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हिंदी में भारत की कई क्षेत्रीय भाषाएं समाहित हैं : स्वामी आगमानंद

Updated at : 16 Sep 2024 12:18 AM (IST)
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हिंदी में भारत की कई क्षेत्रीय भाषाएं समाहित हैं : स्वामी आगमानंद

ध्रुवगंज गांव में हिंदी दिवस पर परिचर्चा, गोष्ठी व गीत-संगीत का कार्यक्रम धर्मानंद कुंवर के यहां आयोजित किया गया

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ध्रुवगंज गांव में हिंदी दिवस पर परिचर्चा, गोष्ठी व गीत-संगीत का कार्यक्रम धर्मानंद कुंवर के यहां आयोजित किया गया. शिवशक्ति योगपीठ के तत्वावधान व स्वामी आगमानंद की अध्यक्षता में गांव में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित कर अभिनव प्रयोग किया गया. स्वामी आगमानंद ने कहा कि जब भक्ति की प्रगाढ़ता होती है, तो कंठ अवरुद्ध हो जाता है और आंखों से आंसू अनायास बहने लगते हैं. वह भजन श्रेष्ठ है, जो मनुष्य के दिल के छूता है. वह वाक्य श्रेष्ठ है, जो मनुष्य में उत्साह भरता है. किसी गांव, किसी शहर, किसी अंचल, किसी क्षेत्र में अच्छा कार्य हो तो प्रसन्नता होती है. हम अपने जीवन में बीत रहे हर अमूल्य क्षण का आनंद लेने आते हैं. आत्माओं से आत्माओं का सम्मेलन कराना, संत जनों का कार्य होता है. उन्होंने बताया कि विश्व की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत है. हिंदी भी संस्कृत से ही निकली. हिंदी संस्कृत की बेटी है. हिंदी में भारत की कई क्षेत्रीय भाषाएं समाहित हैं. हिंदी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है, बशर्ते इसका सही से सर्वेक्षण हो. हिंदी के तीन स्वरूप हैं- संपर्क भाषा, राष्ट्रभाषा और राजभाषा. संपर्क भाषा तो हिंदी है ही. दक्षिण से पूर्वोत्तर भारत में हिंदी लोग बोल व समझत लेते हैं. हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दे दिया गया. कई तरह के राजनीतिक अवरोध से हिंदी को राजभाषा नहीं बनाया गया. अगर हिंदी को राजभाषा बना दिया जाता, तो भारत दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश होता. हमें अपनी मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए. हिंदी दिवस पर हिंदी को याद कर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती है. ध्रुवगंज गांव में इस तरह का कार्यक्रमहोना सौभाग्य की बात है. प्रो डॉ हिमांशु मोहन मिश्र दीपक ने अपने भजनों से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. हिंदी दिवस परिचर्चा में पं आमोद कुमार मिश्र, डॉ ज्योतिंद्र चौधरी, पं शंभु शरण शास्त्री, राजकुमार, स्वामी मानवानंद, मनोरंजन प्रसाद सिंह ने अपने सारगर्भित विचार रखे. मंच पर रूपौली के विधायक शंकर सिंह, स्वामी शिव प्रेमानंद भाई जी, पं प्रेमशंकर भारती, कुंदन बाबा, मृत्युंजय कुंवर, सुबोध, सुधीर चौधरी, शिव शरण पोद्दार, विनय कुमार परमार, मुरारी मिश्र उपस्थित थे. मंच संचालन चंदन कुमार व संयोजन पुष्पा ने किया. भारी बारिश के बावजूद कार्यक्रम में काफी संख्या में लोग उपस्थित थे.

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