bhagalpur news. महर्षि मेंहीं कहते थे- अपने पसीने की कमाई खायें, आपस में मेल से रहें

Published by :NISHI RANJAN THAKUR
Published at :30 Apr 2026 8:18 PM (IST)
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bhagalpur news. महर्षि मेंहीं कहते थे- अपने पसीने की कमाई खायें, आपस में मेल से रहें

जिले में गुरुवार को वैशाख शुक्ल चतुर्दशी पर महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज की 142वीं जयंती धूमधाम से मनायी गयी.

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धूमधाम से मनायी गयी महर्षि मेंहीं की 142वीं जयंती, जिले के विभिन्न स्थानों पर प्रभातफेरी

जिले में गुरुवार को वैशाख शुक्ल चतुर्दशी पर महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज की 142वीं जयंती धूमधाम से मनायी गयी. जगह-जगह पर प्रभातफेरी, पुष्पांजलि, सत्संग व प्रवचन का आयोजन हुआ. जयंती समारोह का मुख्य आयोजन भागलपुर स्थित कुप्पघाट महर्षि मेंहीं आश्रम में हुआ. वर्तमान आचार्य श्री महर्षि हरिनंदन बाबा ने कुप्पाघाट आश्रम में जयंती समारोह पर सत्संगियों को आशीर्वाद दिया. प्रवचन सत्र में गुरुसेवी स्वामी भगीरथ बाबा ने कहा कि गुरु महाराज महर्षि मेंहीं कहते थे- अपने पसीने की कमाई खायें. आपस में मेल से रहें. ईश्वर एक है. उनके पास जाने का रास्ता एक है. वह रास्ता बाहर नहीं अंदर है.

संत का अवतरण जगत के उद्धार के लिए : दिव्य प्रकाशमंच का संचालन स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने किया, तो आयोजन का संचालन अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के महामंत्री दिव्य प्रकाश ने किया. उन्होंने कहा कि संत का अवतरण जगत के उद्धार के लिए होता है. तीन तापों दैहिक, दैविक व भौतिक से मुक्त करने वाले संत ही हो सकते हैं. ऐसे ही संत हमारे गुरु महाराज महर्षि मेंहीं परमहंस थे. स्वागत भाषण अध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने प्रस्तुत किया और कहा कि सद्गुरु महर्षि मेंहीं महाराज का कहना था कर्म ही पूजा है. कर्म से बढ़ कर कोई भक्ति नहीं है. इससे पहले विभिन्न संतों एवं अतिथियों ने महर्षि मेंहीं महाराज एवं महर्षि संतसेवी महाराज के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की. जयंती समारोह में कटिहार, पूर्णिया, सुपौल, नवगछिया, बांका, गोड्डा, साहेबगंज, किशनगंज, मुंगेर समेत प्रांत के विभिन्न हिस्सों के हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. आश्रम परिसर में एक दिन पहले से ही विभिन्न स्थानों से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था. श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला दिनभर चलता रहा.

विभिन्न संतों ने किये प्रवचनमहर्षि मेंहीं परमहंस महाराज के जयंती समारोह के मुख्य आयोजन के अंतर्गत विभिन्न संतों ने गुरु महिमा एवं महर्षि मेंहीं के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. इससे पहले प्रवचन सत्र का प्रारंभ रवींद्र बाबा ने स्तुति पाठ एवं ग्रंथ पाठ से किया. गुरुचरणसेवी प्रमोद बाबा ने कहा कि मनुष्य की उपयोगिता भक्ति करने में है. संतमत का सिद्धांत छोटा है. गुरु, ध्यान और सत्संग. स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने कहा कि सद्गुरु ने हम मानव को माया के बंधन से निकलने का उपाय बताया है. स्वामी विवेकानंद बाबा ने कहा सद्गुरु के नाम से ही कल्याण होगा. स्वामी परमानंद बाबा ने कहा कि अपने अंदर में जाइये गुरु महाराज का दर्शन हो जायेगा. स्वामी परमानंद बाबा, स्वामी नंदन बाबा, स्वामी संजीवानंद बाबा, स्वामी महेंद्र बाबा आदि संतों ने भी प्रवचन किये.

इस मौके पर मनु भास्कर, अवधेश यादव, केबी यादव, जयप्रकाश यादव, आश्रम व्यवस्थापक अजय जायसवाल, राम कुमार यादव, रमेश बाबा, पंकज बाबा, संजय बाबा, प्रवीण कुमार, अशोक यादव, जगदीश यादव, श्याम सुंदर, अमित, सूरज, बादल, रोशन, कुमार गौरव आदि उपस्थित थे.

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