Bhagalpur news भगवान के बाल रूप का दर्शन जो करता है वह धन्य है : साध्वी धर्म मूर्ति

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1 कुंडीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में पांचवें दिन अयोध्या धाम से पधारीं साध्वी धर्म मूर्ति जी ने कथा वाचन के दौरान श्री राम कथा का वर्णन करते हुए भगवान राघवेंद्र सरकार की बाल लीला का दर्शन कराया.

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कहलगांव श्यामपुर स्थित महंत बाबा स्थान में विश्व कल्याणार्थ आयोजित 11 कुंडीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में पांचवें दिन अयोध्या धाम से पधारीं साध्वी धर्म मूर्ति जी ने कथा वाचन के दौरान श्री राम कथा का वर्णन करते हुए भगवान राघवेंद्र सरकार की बाल लीला का दर्शन कराया. उन्होंने कहा कि भगवान के बाल रूप का दर्शन जो करता है वह धन्य है. भगवान राम, लक्ष्मण, विश्वामित्र सभी ऋषि मुनियों के संग मिथिला में जानकी माता के स्वयंवर में पहुंचते है और मिथिला का दर्शन करते हैं. कथा सुनने के लिए श्यामपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु की भीड़ लगी रही. मौके पर आयोजन समिति के सदस्य जवाहर राय, चंदन कुमार गहलौत, पंकज घोष, शिव शंकर दास, मणिकांत राय, सिट्टू यादव सहित अन्य सदस्य मौजूद थे.

कुमैठा में सहस्त्र चंडी महायज्ञ में हो रहा संगीतमय कार्यक्रम

सुलतानगंजकुमैठा में श्रीश्री 1008 सहस्त्र चंडी महायज्ञ में शनिवार को संगीतमय कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. कुमैठा कालिका स्थान के पीछे महायज्ञ स्थल पर हवन, पूजन व आरती को लेकर ग्रामीण व श्रद्धालुओं का काफी भीड़ हो रही है. सहस्त्र चंडी महायज्ञ आठ मई तक स्वामी शशि धराचार्य जी महाराज के सानिध्य में हो रहा है. सत्संग प्रवचन कार्यक्रम के दौरान श्रीराम कथा में स्वामी अगमानंद जी महाराज ने प्रवचन में कई ज्ञान व आध्यात्म की जानकारी दी. शाम चार से संध्या आठ बजे तक कथा का आयोजन हो रहा है. आयोजन समिति के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिश्रा, सचिव पुरुषोत्तम कुमार उपाध्याय, कोषाध्यक्ष संतोष कुमार झा ने बताया कि रात में रासलीला का आयोजन हो रहा है. रासलीला का आनंद में ग्रामीण सराबोर दिखे. दीपक मिश्रा व सुनील मिश्रा का संगीतमय कार्यक्रम की प्रस्तुति होगी. आयोजन की सफलता को लेकर ग्रामीण तत्पर हैं.

रामकथा का श्रवण मनुष्य समय निकाल कर करें : प्रियंका शास्त्री

शाहकुंड दीनदयालपुर गांव में रामकथा के चौथे दिन साध्वी प्रियंका शास्त्री ने कहा कि मनुष्य रामकथा का समय निकाल कर अवश्य श्रवण करे, सुख शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती हैं. उन्होंने सती चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान शंकर, जो स्वयं कथा के जनक है, लेकिन जब कुम्भज ऋषि कथा कह रहे थे, तो भोलेनाथ जो ज्ञान के अथाह सागर है वह स्वयं अपनी प्यास बुझाने एक घड़े के पास गये. प्रवचन के माध्यम से कहा गया कि कोई चाहे जितने बड़े पद पर हो उन्हें समय निकाल कर प्रवचन अवश्य सुनना चाहिए. प्रवचन को सुनने आसपास गांव के भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है.

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