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दो अस्पतालों की बिजली 21वें दिन भी गुल, डॉक्टर से लेकर मरीज तक परेशान

Updated at : 17 Oct 2024 9:47 PM (IST)
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दो अस्पतालों की बिजली 21वें दिन भी गुल, डॉक्टर से लेकर मरीज तक परेशान

दो अस्पतालों की बिजली 21वें दिन भी गुल, डॉक्टर से लेकर मरीज तक परेशान

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प्रभात खबर पड़ताल – मोहद्दीनगर में एक ही भवन में चल रहे एपीएचसी व शहरी पीएचसी में कंप्यूटर, फ्रिज समेत अन्य उपकरण बंद – शहर के मोहद्दीनगर स्थित एक ही भवन में चल रहे के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) में लगातार 21वें दिन भी बिजली संकट जारी रहा. बिजली गुल रहने से दोनों अस्पतालों का इनवर्टर पूरी तरह डाउन हो गया है. बल्ब, पंखे, फ्रिज, कंप्यूटर समेत अन्य विद्युत चलित उपकरण ठप हैं. मरीजों की पर्ची भी ऑनलाइन की बजाय मैनुअल बन रहा है. मरीजों व दवाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग भी बंद है. जल संकट गहरा गया है. बाथरूम समेत अन्य जगहों पर गंदगी पसरी हुई है. कई दिनों से गर्मी व ऊमस में काम करने से कर्मचारियों की सेहत बिगड़ रही है. गुरुवार को प्रभात खबर पड़ताल में पाया गया कि गर्मी से परेशान महिला डॉक्टर व कर्मचारी अपने हाथ से पंखा झेल रहे थे. बिल बकाया होने से बिजली काट दी गयी है. कौन बिल जमा करेगा, इसको लेकर असमंजस : एपीएचसी की प्रभारी डॉ वंदना कुमारी ने बताया कि बिजली बिल के भुगतान के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी जगदीशपुर को पत्र लिखा गया है. लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है. अस्पताल के कर्मियों ने बताया कि यह भवन एपीएचसी का है. इस भवन में शहरी पीएचसी को भी शिफ्ट कर दिया गया है. यह एपीएचसी जगदीशपुर के सीएचसी से टैग है. ऐसे में जगदीशपुर सीएचसी को बिल को लेकर फैसला करना है. जबकि सीएचसी के प्रभारी डॉ ब्रजभूषण ने कहा कि शहरी पीएचसी के माध्यम से बिल का भुगतान होगा. एपीएचसी महज एक कमरे में चल रहा है. जबकि परिसर के अधिकांश हिस्से में शहरी पीएचसी चल रही है. फ्रिज बंद रहने से लौटाया गया वैक्सीन के 7570 डोज : शहरी पीएचसी के कर्मियों ने बताया कि 26 सितंबर को ही बिजली कटी है. इसके बाद 28 सितंबर को ही विभिन्न तरह के वैक्सीन के 7570 डोज जिला प्रतिरक्षण कार्यालय को लौटा दिया गया. इस कारण वैक्सीनेशन का काम भी बंद है. 21881 रुपये माइनस में है स्मार्ट मीटर का बैलेंस : अस्पताल परिसर के स्मार्ट मीटर में दर्ज उपभोक्ता संख्या से जांच करने पर पता चला कि इसका बैलेंस माइनस में 21881 रुपये तक चला गया है. मामले पर जबकि जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम मणिभूषण झा का कहना है कि बिजली कंपनी को पोस्ट पेड मीटर लगाने की लिखित मांग की गयी है. लेकिन अबतक स्मार्ट यानी प्रीपेड मीटर को बदला नहीं गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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