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Bhagalpur News: राहत शिविर में व्यवस्था 500 पीड़ित की, पहुंचे हैं हजार से अधिक

Updated at : 12 Aug 2025 1:16 AM (IST)
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Bhagalpur News: राहत शिविर में व्यवस्था 500 पीड़ित की, पहुंचे हैं हजार से अधिक

दर्जनों घर पानी में बह चुके हैं. पीड़ित ग्रामीण शहर की ओर पलायन कर रहे हैं लेकिन बाढ़ ने शहरी क्षेत्र के कुछ इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है.

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जिले में बाढ़ हुआ विकराल

= विश्वविद्यालय बाल विद्या निकेतन शिविर में खाना और पेयजल की परेशानी

= टीला कोठी में रह रहे बाढ़ पीड़ित पीने के लिए पानी और मवेशी चारा के लिए भी परेशान

संवाददाता, भागलपुर

जिले में लगातार बाढ़ का कहर जारी है. गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में भारी तबाही मची है. भीषण बाढ़ के कारण जिले के सैकड़ों घरों में पानी घुस चुका है. दर्जनों घर पानी में बह चुके हैं. पीड़ित ग्रामीण शहर की ओर पलायन कर रहे हैं लेकिन बाढ़ ने शहरी क्षेत्र के कुछ इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है. बाढ़ प्रभावितों के लिए जिला प्रशासन ने विभिन्न स्थानों पर राहत शिविर बनाये हैं. इनमें रहने-खाने की व्यवस्था, प्रतिदिन दो वक्त का भोजन, मवेशियों के लिए चारा और प्राथमिक उपचार की सुविधा दी जा रही है.

टीला कोठी शिविर का हाल

शिविर में पीड़ितों की व्यथा का हाल जानने के लिए प्रभात खबर ने सोमवार को विश्वविद्यालय के टीला कोठी शिविर का जायजा लिया. यहां बिंदटोली से आये चंद्रदेव महतो सहित कई बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि बाढ़ में उनका घर और खेत सब डूब गया. पिछले 10 दिनों से वे राहत शिविर में हैं लेकिन सरकारी स्तर से समुचित व्यवस्था नहीं मिली. उन्हें सरकारी स्तर से कोई मदद नहीं मिल रही है. भाेजन के लिए भी तरस रहे हैं. भोजन की व्यवस्था शिविर से दूर है, दवा और मवेशियों का चारा लेने आधा किलोमीटर जाना पड़ता है. महिलाओं ने आक्रोश जताया कि वोट के समय जनप्रतिनिधि आते हैं, लेकिन इस कठिन घड़ी में कोई हाल जानने नहीं आया. पीने का पानी नहीं है, छोटे बच्चों के लिए खतरा बना हुआ है. सफाई के अभाव में कई महिलाएं बीमार हो रही हैं. रात के वक्त अंधेरे में रहना पड़ता था, बाद में समाजसेवी विजय यादव ने बिजली की व्यवस्था करायी.

पर्याप्त संसाधनों का अभाव

विश्वविद्यालय बाल निकेतन में रसोई और मेडिकल कैंप लगाये गये हैं, जहां लगभग 200 बाढ़ पीड़ित रह रहे हैं. वहीं, टीला कोठी पर 700 से अधिक लोग रह रहे हैं. काफी मशक्कत बाद छत के लिए प्लास्टिक मिला. पीड़ितों ने बताया कि मवेशियों के लिए चारा बेहद कम है और भोजन भी एक समय ही मिल पाता है. विश्वविद्यालय बाल विद्या निकेतन शिविर में तमाम इंतजाम की जिम्मेवारी प्रभारी प्राचार्य मनोज कुमार मंडल की है. उन्होंने बताया कि सरकारी स्तर से दो वक्त का भोजन और प्राथमिक उपचार की सुविधा दी जा रही है. पांच सौ पीड़ितों के लिए व्यवस्था है लेकिन संख्या हजार से अधिक है, जिससे समस्याएं बढ़ रही हैं. अब सवाल यह है कि टीला कोठी में रह रहे इन पीड़ितों की सुधि कौन लेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANJIV KUMAR

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SANJIV KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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