भागलपुर : न्यायिक हिरासत में गये इंजीनियर, होंगे बर्खास्त
Updated at : 20 Nov 2019 7:56 AM (IST)
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रिश्वत लेने के मामले में कोर्ट में हुई पेशी भागलपुर : 16 लाख रुपये रिश्वत लेते समय गिरफ्तार कटिहार में तैनात पथ निर्माण विभाग के एक्जक्यूटिव इंजीनियर अरविंद कुमार को पटना से निगरानी की टीम भागलपुर के प्रथम निगरानी कोर्ट में मंगलवार शाम साढ़े चार बजे पेश किया गया. यहां से कोर्ट ने उन्हें 14 […]
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रिश्वत लेने के मामले में कोर्ट में हुई पेशी
भागलपुर : 16 लाख रुपये रिश्वत लेते समय गिरफ्तार कटिहार में तैनात पथ निर्माण विभाग के एक्जक्यूटिव इंजीनियर अरविंद कुमार को पटना से निगरानी की टीम भागलपुर के प्रथम निगरानी कोर्ट में मंगलवार शाम साढ़े चार बजे पेश किया गया. यहां से कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में सेंट्रल जेल भागलपुर भेज दिया. भाजपा एमएलसी अशोक अग्रवाल के बेटे सौरभ अग्रवाल की कंपनी टॉपलाइन से रिश्वत लेना इंजीनियर को भारी पड़ा.
गिरफ्तार होने के बाद पथ निर्माण विभाग के एक्सक्यूटिव इंजीनियर अरविंद कुमार बर्खास्त होंगे. इस संबंध में कानूनी प्रक्रिया चल रही है. पेशी के दौरान विजिलेंस की टीम ने जब्त किये 16 लाख भी कोर्ट में पेश किये. इसमें दो हजार के छह बंडल और पांच सौ रुपये के आठ बंडल थे.
पेशी से जेल जाते समय आरोपित इंजीनियर ने पार्षद अशोक अग्रवाल पर फंसाने का आरोप लगाया. कहा कि उनके खिलाफ कई तरह के कागजात मुख्यालय को भेजा है. उन कागजात से कार्रवाई होने का डर था. संबंधित कागजात विभाग के प्रधान सचिव को भेजा है. पेशी में अदालत को बताया है कि विजिलेंस अधिकारियों ने उनके साथ हाथापाई की है. हालांकि, विजिलेंस अधिकारियों ने खंडन किया. कहा कि मेडिकल रिपोर्ट संलग्न है. कंपनी टॉपलाइन से रिश्वत लेते इंजीनियर को 18 नवंबर को गिरफ्तार किया था.
रिश्वतकांड के बाद विजलेंस की टीम से बचने के लिए इंजीनियर अपने आपको कमरे में बंद कर लिया था. बहुत मुश्किल से उन्हें बाहर निकाला गया. निगरानी ने कहा है कि रोड मेंटनेंसकाम को लेकर टॉपलाइन कंपनी के 83.52 करोड़ रुपये बिल के पेमेंट के लिए कंपनी के कटिहार के बिंची कोढा निवासी निखिल से कुल एग्रीमेंट का 84 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी. विजलेंस के कहने पर 16 लाख रिश्वत की पहली किस्त को देने की योजना बनायी थी.
एमएलसी अशोक अग्रवाल की पत्नी उषा हैं कंपनी की मालकिन : एमएलसी अशोक अग्रवाल की पत्नी उषा अग्रवाल टॉप लाइन कंपनी की मालकिन हैं.
यह कंपनी बड़ी-बड़ी बजट की कार्य करती है. सूबे के कई जिलों में सड़क निर्माण सहित अन्य कार्यों को कर रही है. कंपनी ने पथ निर्माण विभाग से निकाले गये 85 करोड़ के सड़क मरम्मत के टेंडर का काम लिया था. काम पूरा करने के बाद बचे करीब 22 करोड़ बिल भुगतान पिछले ढाई माह से विभाग में फंसा था.
पत्नी से सुबह पांच बजे तक हुई पूछताछ
विजिलेंस के अफसरों ने मंगलवार सुबह पांच बजे तक पथ निर्माण विभाग के पकड़े गये घूसखोर इंजीनियर अरविंद कुमार, पत्नी, बेटे और अन्य परिजनों से पूछताछ करते रहे. लेकिन इंजीनियर आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा.
उसने तो यहां तक कहा दिया कि उसके दूसरे फ्लैट के बाथरूम में नोटों के जलाने के अवशेष कहां से आये और बड़ी मात्रा में बिखरे पड़े राख की कहानी क्या है, उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी तक नहीं है. पूरे मामले से ही अंत तक अनभिज्ञता जाहिर करते रहे. इंजीनियर ने सिर्फ इतना ही बताया कि उसे फंसाया गया है.
परिजनों ने कुछ नहीं बताया. सिर्फ पत्नी ने घर से बरामद हुए 12-13 लाख के गहनों को अपना बताया है. पूछताछ में इंजीनियर ने किसी प्रकार का कोई सहयोग नहीं किया. घर की पूरी तलाशी के दौरान इधर-उधर बिखरे पड़े कई नोट मिले थे, जिन्हें इकठ्ठा करने पर कुल 90 हजार रुपये ही हुए हैं. कैश की बरामदगी के नाम पर उसके घर से महज यही 90 हजार रुपये बरामद हुए हैं, जिसमें दो हजार और 500 के नोट हैं.
निवेश से संबंधित कागजात जला डाले : जांच में पता चला कि इंजीनियर के परिवार वालों ने एक करोड़ रुपये के साथ निवेश और जमीन-जायदाद से जुड़े कई कागजात भी जला दिये हैं. शहर के कुछ बड़े बिजनेस फॉर्म, एजेंसी समेत अन्य कई स्थानों पर निवेश से जुड़े कई अहम कागजात जलाये गये हैं.
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