निष्पक्ष जांच हुई, तो नगर निगम में बड़े-बड़े घोटाले आयेंगे सामने
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Aug 2018 6:07 AM
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भागलपुर : मंगलवार को निगम कार्यालय में मेयर सीमा साहा और डिप्टी मेयर राजेश वर्मा ने नगर आयुक्त समेत कई विभागों पर आरोपों की झड़ी लगा दी. इसे लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में संयुक्त रूप से मेयर व डिप्टी ने कहा कि, निगम के सामान्य बोर्ड की बैठक में निगम कार्यालय की सभी शाखाओं की […]
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भागलपुर : मंगलवार को निगम कार्यालय में मेयर सीमा साहा और डिप्टी मेयर राजेश वर्मा ने नगर आयुक्त समेत कई विभागों पर आरोपों की झड़ी लगा दी. इसे लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में संयुक्त रूप से मेयर व डिप्टी ने कहा कि, निगम के सामान्य बोर्ड की बैठक में निगम कार्यालय की सभी शाखाओं की जांच की स्वीकृति दी गयी, लेेकिन नगर आयुक्त ने इस प्रस्ताव को हटाकर यह सिद्ध कर दिया कि नगर निगम में भष्टाचार व्याप्त है. उन्होंने कहा कि, निगम कार्यालय की जांच निष्पक्ष तरीके से करने पर बड़े घोटाले का पर्दाफाश होगा.
लगाये कई गंभीर आरोप
स्वयंसेवी संस्था को क्यों बचाया : निगम द्वारा शहर के होल्डिंग सर्वे कार्य में एक स्वयंसेवी संस्था के विपत्र भुगतान में भी हेराफेरी पकड़ी गयी. इसकी जांच रिपोर्ट में निगम के वरिष्ठ कर्मचारी शंकराचार्य ने आरोप सिद्ध करते हुए विधिसम्मत कार्रवाई की अनुशंसा की. लेकिन विभाग ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की.
40 हजार गबन के मामले को दबा दिया : निगम की योजना शाखा के प्रभारी आदित्य जायसवाल पर 40 हजार रुपये गबन करने का मामला सामने आया. लेकिन यह मामला भी दब गया. योजना शाखा प्रभारी ने यह कह दिया कि, उन्होंने निगम को भुगतान कर दिया है. लेकिन क्या भुगतान कर देने से कार्रवाई नहीं हो सकती.
आवास निर्माण में उड़ी निर्देश की धज्जी : योजना शाखा प्रभारी नगर आयुक्त के मनचाहे ठेकेदार को नियम को ताक पर रखकर नगर आयुक्त के आवास निर्माण का काम दिया और आर्थिक लाभ लिया. सरकार के प्रधान सचिव से प्राप्त निर्देशाें का उल्लंघन किया और साथ ही वर्तमान नगर निगम के कैबिनेट के निर्णय को भी नजरअंदाज कर दिया. करोड़ों की राशि से पहले शहर का विकास होना चाहिए, लेकिन नगर आयुक्त के आवास पर खर्च कर दिया. फंसने लगे तो टेंडर की प्रक्रिया पूरी की. आखिर नगर आयुक्त का एक संवेदक पर इतनी मेहरबानी क्यों.
संपत्ति जांच करने की मांग की, अनसुना किया : स्वास्थ्य शाखा प्रभारी महेश प्रसाद साह ने भी राशि की हेराफेरी की. उनकी संपत्ति के जांच की मांग की गयी थी, लेेकिन निगम के द्वारा जांच नहीं की गयी.
नक्शा पास करने में मोटी रकम की मांग क्यों : बिल्डिंग बॉयलाॅज के तहत गंगा नदी से 200 मीटर के बाद ही नक्शा पास करने की स्वीकृति दी जाती है. लेकिन स्थानीय लोगाें को नक्शा पास कराने के लिए निगम का चक्कर लगाना पड़ता है. विभाग के कर्मी नक्शा पास कराने के लिए भारी रकम की मांग करते हैं. नियम को ताक पर रख कर नक्शा पास किया जाता है.
वृद्धाश्रम में अनियमितता का क्या हुआ : वृद्धाश्रम में निरीक्षण (डिप्टी मेयर द्वारा) किया गया था. इसमें अनियमितता पायी गयी थी. आरटीआइ के तहत जानकारी मांगी गयी थी, वह भी नहीं मिली. निगम के सहायक अभियंता पद पर राकेश कुमार सिन्हा जो कृषि से डिप्लोमाधारी हैं, उनसे सड़क के अभियंता के रूप में काम कराया जाना कहां तक उचित है.
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