हर गड्ढे में चीखती रही, जाम हटाने के लिए हाथ जोड़ते रहे परिजन, हो गयी देर और मर गयी गर्भवती विभा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Jul 2018 5:00 AM
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भागलपुर : एनएच 80 के गड्ढे और जाम ने सोमवार को एक गर्भवती विभा कुमारी की जान ले ली. विभा के साथ ही बिना दुनिया देखे उसके गर्भ का मासूम भी चल बसा. उसकी स्थिति गंभीर थी. उसको खून की कमी हो गयी थी. परिजनों के अनुसार लगातार खून निकल रहा था. परिजन उसे लेकर […]
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भागलपुर : एनएच 80 के गड्ढे और जाम ने सोमवार को एक गर्भवती विभा कुमारी की जान ले ली. विभा के साथ ही बिना दुनिया देखे उसके गर्भ का मासूम भी चल बसा. उसकी स्थिति गंभीर थी. उसको खून की कमी हो गयी थी. परिजनों के अनुसार लगातार खून निकल रहा था. परिजन उसे लेकर मायागंज अस्पताल आ रहे थे, पर कृषि विश्वविद्यालय के पास के जाम में उनका अॉटो फंस गया. जैसे-तैसे वो लोग आगे बढ़े पर सड़क के गड्ढे में अॉटो के घुसने और निकलने से गर्भवती की हालत और खराब होती गयी.
गर्भवती कराहती रही, परिजन किसी तरह जाम हटाने में लगे रहे, पर कुछ काम नहीं आया. हर गड्डे में अॉटो के घुसने पर वह चीख पड़ती थी. किसी तरह परिजन उसे लेकर दो घंटे में मायागंज पहुंचे, पर तब तक उक्त महिला की मौत हो चुकी थी. बिलख रहे परिजनों का कहना था कि सड़क ठीक होती और जाम नहीं लगा होता तो वो आधे घंटे से कम समय में अस्पताल पहुंच जाते और विभा की जान बच जाती.
धोरैया में हुई थी शादी
धोरैया (बांसबीटा) के विवेकानंद मंडल की पत्नी विभा कुमारी गर्भवती थी. बेहतर सुविधा के लिए वह अपने मायके गोराडीह के जयकुट गांव में रह रही थी. कल जब उसे प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन उसे देर रात सन्हौला पीएचसी ले गये. उसको लगातार ब्लीडिंग हो रहा था. वहां एएनएम ने उसकी हालत देख उसे मायागंज रेफर कर दिया. परिजन बेहतर चिकित्सा के लिए उसे लेकर सुबह आठ बजे सबौर स्थित एक निजी क्लिनिक आये. वहां भी जब उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो वो उसे लेकर अॉटो से मायागंज चल दिये. पर जाम और गड्ढे की वजह से उसकी जान नहीं बच पायी.
सबौर से मायागंज अस्पताल पहुंचने में लग गये दो घंटे
विभा के पिता रामचंद्र मंडल ने बताया कि जाम की वजह से वो लोग न तो आगे जा पा रहे थे और न हीं पीछे. किसी तरह से सबौर से मायागंज का रास्ता दो घंटे में पूरा किया. मायागंज अस्पताल में विभा को चिकित्सक ने देखने के साथ ही मृत बता दिया.
सड़क ने ले ली मेरी बेटी की जान
रामचंद्र मंडल ने बताया सबौर से मायागंज की दूरी हम ऑटो से आधे घंटे में पूरी कर लेते. लेकिन हमें दो घंटे का समय लगा. इंजीनियरिंग कॉलेज के समीप सड़क तालाब बन गयी है. ऑटो इसमें फंस गया था. पूरा रास्ता खराब है. अपनी बेटी को बचाने के लिए ऑटो को पीछे से धक्का मार रहे थे. लाख प्रयास के बाद भी हम अपनी बेटी को बचाने में सफल नहीं हो सके. शहर के गड्ढे और जाम ने मेरी बेटी को मार दिया. यह हादसा नहीं हत्या है. उनका दामाद विवेकानंद दिल्ली में मजदूरी करता है. उनकी बेटी विभा को एक बेटी है जो अब अनाथ हो गयी.
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