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श्रावणी मेला के दौरान यहां दिखता है भाईचारे का संगम, मुसलिम भाई मांगते हैं कांवरियों की सलामती की दुआ

Updated at : 21 Jul 2017 8:09 PM (IST)
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श्रावणी मेला के दौरान यहां दिखता है भाईचारे का संगम, मुसलिम भाई मांगते हैं कांवरियों की सलामती की दुआ

शुभंकर सुलतानगंज : श्रावणी मेला के दौरान अजगैवीनगरी में सौहार्द और भाईचारे का संगम भी देखने को मिलता है. यहां के मुसलिम भाई कांवरियों की सलामती के लिए अल्लाह ताला से दुआ मांगते हैं. मो इजराइल, मो चांद, मो मंजूर, मो कुरबान अली, मो नईम उद्दीन, मो सफरूद्दीन आदि ने बताया कि कांवरियों की सेवा […]

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शुभंकर

सुलतानगंज : श्रावणी मेला के दौरान अजगैवीनगरी में सौहार्द और भाईचारे का संगम भी देखने को मिलता है. यहां के मुसलिम भाई कांवरियों की सलामती के लिए अल्लाह ताला से दुआ मांगते हैं. मो इजराइल, मो चांद, मो मंजूर, मो कुरबान अली, मो नईम उद्दीन, मो सफरूद्दीन आदि ने बताया कि कांवरियों की सेवा में पूरे सावन मुसलिम भी लगे रहते हैं. बड़ी मसजिद (शाही मसजिद) में शुक्रवार को मुसलिम भाइयों ने कांवरियों के लिए विशेष नमाज अदा करते हुए उनके सुख, शांति व समृद्धि के लिए दुआ मांगी.

मसजिद के इमाम ने बताया कि हर साल सावन में यहां नमाज अदा करने के दौरान कांवरियों के लिए विशेष दुआ मांगी जाती है. बड़ी संख्या में कांवरिये भी मसजिद आकर दुआ मांगने आते हैं. कई कांवरिया यहां चादरपोशी भी करते हैं. कांवरियों की यात्रा सुलभ व सुरक्षित हो, वे पूजा के बाद अपने घर सलामत पहुंचें.

अजान व प्रार्थना से अमन का संदेश
उत्तरवाहिनी गंगा तट पर अजान व प्रार्थना से अमन का संदेश मिल रहा है. अजगैवीनाथ मंदिर व शाही मसजिद के बीच बहती अविरल-निर्मल गंगा यहां सौहार्द व भाईचारे की अनुभूति देती है. सूर्यास्त होते ही अजगैवीनाथ मंदिर में सैकड़ों दीप जल उठते हैं. घंटा व शंख की आवाज गूंजने लगती है. वहीं गंगा तट के पूर्वी छोर स्थित शाही मसजिद से अजान की आवाज आती है.

कांवरिया की सेवा से ही मिलता है अल्लाह की दुआ
सावन का इंतजार मुस्लिम भाई को बेसब्री से रहता है. मुस्लिम भाई कांवरियों की सेवा में तीन माह तक तत्पर रहते है. सुलतानगंज में कई ऐसे मुस्लिम घर है, जो सालों भर श्रावणी मेला में बिकने वाले सामग्री का निर्माण करते है. अजगैवीनगरी में मुस्लिम भाई कांवरियों की सेवा में तल्लीन देखे जा सकते है. सावन माह में जुम्मे की नवाज से बड़ी होती है कांवरियों की सेवा. कांवरियों की सेवा से ही अल्लाह की दुआ विशेष मिलती है.

बताया गया कि कई मुस्लिम समुदाय के लोग कांवरियों के लिए कई प्रकार के वस्तुएं बिक्री करते है. जिससे वो नवाज अदा करने नही पहुंच पाते है. कांवरियों की सेवा पहले, अल्लाह की नवाज बाद में. सांप्रदायिक सद्भाव का मिसाल पेश करते हुए मुस्लिम समुदाय पूरे माह कांवरियों के लिए तत्पर रहते है. सावन में मुस्लिम भाईयों के लिए कांवरिया की सेवा ही सर्वोपरि होती है. सारे परिवार मिल कर कांवरियों की सेवा में तल्लीन रहते है. श्रावणी मेला में हिंदु-मुस्लिम के बीच आपसी भाईचारे व सद्भाव का मिसाल कांवरियों की सेवा के साथ देखी जाती है.

सावन में मुस्लिम समुदाय के लोग शुद्धता व पवित्रता पर विशेष ध्यान देते है. कांवरियों की सेवा में कोई कमी नहीं हो, इसके लिए मुस्लिम भाई तत्पर रहते है. मेला में मुस्लिम भाई का भी कांवरियों की सेवा में काफी योगदान देखा जाता है. सेवा के नाम पर अजगैवी नगरी में दोनों समुदाय के द्वारा कांवरिया के बीच एक अच्छा संदेश मिलता है. श्रावणी मेला में कांवरिया इस संदेश को अपने साथ लेकर हर वर्ष जाते है.

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