Ranchi: अवैध भवनों को नियमित कराने में रुचि नहीं, 30 दिन में आए सिर्फ 51 आवेदन

Published by : AmleshNandan Sinha Updated At : 26 May 2026 9:52 PM

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सांकेतिक तस्वीर AI Image

Ranchi: अवैध भवनों को नियमित कराने के लिए शुरू की गई प्रक्रिया को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है. 30 दिनों में केवल 51 आवेदन आने से योजना की रफ्तार धीमी नजर आ रही है. इसका मुख्य कारण जटिल नियमों को माना जा रहा है. पूरी खबर नीचे पढ़ें...

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उत्तम महतो
Ranchi: राज्य सरकार ने अवैध भवनों को नियमित करने के लिए झारखंड अनधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली-2026 लायी है. 27 अप्रैल को इसे लागू किया गया था. इसके तहत अवैध रूप से बने भवनों को नियमित करने के लिए 60 दिनों के अंदर नगर निकायों में आवेदन करना है. बुधवार को इस स्कीम को लागू हुए एक माह यानी 30 दिन हो गये, लेकिन अब तक नियमितीकरण के लिए सिर्फ 51 आवेदन (नगर निगम में 40 और आरआरडीए में 11) आये हैं.

स्कीम की शर्तें काफी जटिल

इस संबंध में आर्किटेक्ट सुजीत भगत का कहना है कि इस स्कीम में ऐसी-ऐसी जटिल शर्तें रख दी गयी हैं, जिससे अधिकतर लोगों का नक्शा पास ही नहीं होगा. इस कारण लोग आवेदन नहीं कर रहे हैं. इसे दुरुस्त कराये जाने को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. उनसे आग्रह किया है कि इसमें अगर छोटी-मोटी सुधार कर दी जाये, तो इससे लाखों लोगों का कल्याण होगा. अन्यथा इस स्कीम से अधिकतर लोगों को फायदा नहीं होने वाला है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

आर्किटेक्ट अपूर्व मिंज ने कहा कि यह नियमावली राज्य की आम जनता को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लायी गई है. हालांकि, इसके नियमों के अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि राज्य की बड़ी जनजातीय तथा अन्य आबादी, जिनके पास 300 वर्गमीटर (7.4 डिसमिल) से अधिक क्षेत्रफल वाले बड़े भूखंड हैं, इस योजना के लाभ से वंचित रह जायेंगे, क्योंकि यह नियम केवल 7.4 डिसमिल तक के भूखंड क्षेत्र पर लागू होता है. यदि सरकार इस संबंध में आवश्यक संशोधन करते हुए भूखंड क्षेत्र की सीमा में उचित छूट प्रदान करे, तो लगभग 80 प्रतिशत लोग इस योजना का लाभ उठा सकेंगे, जो बड़े भूखंड के स्वामी होने के बावजूद बहुत छोटे निर्मित क्षेत्र के मालिक हैं. इसके अलावा मौजूदा मास्टर प्लान तथा झारखंड बिल्डिंग बायलॉज-2016 के संदर्भ में एफएआर एवं ग्राउंड कवरेज को भी नियमों में स्पष्ट किया जाना चाहिए. साथ ही लेबर सेस को लेकर भी लोग असमंजस की स्थिति में है. इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए.

क्या है नियमितीकरण नियमावली

  • 31 दिसंबर 24 तक बने अवैध भवन हो सकते हैं नियमित
  • आर्किटेक्ट के माध्यम से किया गया ऑनलाइन आवेदन ही होगा मान्य
  • जी प्लस टू और 10 मीटर ऊंचे भवन होंगे नियमित
  • 300 वर्गमीटर के प्लॉट में बने भवन ही आयेंगे इसके दायरे में

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अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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