नहर पर कब्जे का खेल खत्म! बेलवा-साठी नहर से हटेगा अतिक्रमण, 500 से अधिक लोगों पर एफआइआर की तैयारी

Published by : SATISH KUMAR Updated At : 27 Dec 2025 6:18 PM

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बेलवा-साठी नहर के ऊपर वर्षों से फैले अतिक्रमण पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने वाला है.

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नरकटियागंज. बेलवा-साठी नहर के ऊपर वर्षों से फैले अतिक्रमण पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने वाला है. जल संसाधन विभाग की ओर से नहर की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा जमाए लोगों को हटाने के लिए ठोस और निर्णायक पहल शुरू कर दी गई है. त्रिवेणी नहर निर्माण विभाग ने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर की कार्रवाई का मन बना लिया है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है. बेलवा–साठी नहर के कनीय अभियंता रामनिरंजन प्रसाद ने बताया कि गौनाहा, नरकटियागंज और साठी क्षेत्र में नहर के ऊपर अतिक्रमण करने वाले करीब 500 लोगों को चिह्नित किया गया है. इन सभी को पहले कई बार नोटिस दिया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया. अब विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए शिकारपुर, गौनाहा और साठी थाना को प्रतिवेदन भेज दिया है. स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाने वालों पर सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी. विभागीय कार्यवाही के बाद नहर की जमीन का अतिक्रमण करने वाले और खरीद फरोख्त करने वालों में हड़कंप मच गया है. नरकटियागंज शहर में सर्वाधिक अतिक्रमण बेलवा-साठी नहर गौनाहा थाना क्षेत्र के मेघौली गांव के पास त्रिवेणी नहर से निकलती है और नरकटियागंज शहर के बीचोबीच से होते हुए साठी तक जाती है. करीब 30 किलोमीटर लंबी इस नहर के दोनों किनारों और बांध पर कई स्थानों पर अतिक्रमण किया गया है. सबसे अधिक अतिक्रमण नरकटियागंज शहर में देखने को मिलता है, जहां नहर के बांध पर कहीं दुकानें खड़ी हैं तो कहीं आलीशान पक्के मकान तक बना लिए गए हैं. पकड़ी ढाला से लेकर हरदिया और फिर जयमंगलापुर तक नहर पुरी तरह अतिक्रमण में पहुंच कर नाले में तब्दील होने लगा है.शहर में लंबे समय से यह चर्चा भी आम रही है कि नहर की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की खरीद-बिक्री का खेल खुलेआम चलता रहा है. कुछ जगहों पर कब्जा बदलने के लिए मोटी रकम के लेन-देन की बातें भी सामने आती रही हैं. विभागीय कार्रवाई के बाद इस अवैध कारोबार पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है. अतिक्रमण हटने के बाद नहर की मूल संरचना को सुरक्षित किया जाएगा, जिससे जल प्रवाह सुचारू हो सकेगा और भविष्य में बाढ़ व जलजमाव की समस्या से भी राहत मिलेगी. विभाग ने साफ कर दिया है कि यह अभियान किसी दबाव में नहीं रुकेगा. अब देखना यह है कि वर्षों से नहर पर जमे कब्जे कब और कैसे हटते हैं, लेकिन इतना तय है कि बेलवा–साठी नहर से अतिक्रमण का खेल जल्द ही इतिहास बनने वाला है.

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