बाघ का रेस्क्यू नहीं होने पर लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन

Published at :15 Jul 2024 9:38 PM (IST)
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बाघ का रेस्क्यू नहीं होने पर लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन

पुरैनिया गांव से सटे बहने वाली कौड़ेना नदी के तट पर गन्ने के खेत में तीसरे दिन भी बाघ के द्वारा अपना डेरा जमाने के बाद पुरैनिया, पदमौल धोबनी, चिउटाहा, बसंतपुर आदि गांव के लोगों में दहशत का आलम है.

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मैनाटांड़. पुरैनिया गांव से सटे बहने वाली कौड़ेना नदी के तट पर गन्ने के खेत में तीसरे दिन भी बाघ के द्वारा अपना डेरा जमाने के बाद पुरैनिया, पदमौल धोबनी, चिउटाहा, बसंतपुर आदि गांव के लोगों में दहशत का आलम है. वहीं बाघ का अबतक रेस्क्यू नहीं किये जाने से वन विभाग के प्रति लोगों में नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है. नाराजगी जताते हुए मुखिया प्रतिनिधि अनीसुल आजम उर्फ बेगू, नौशाद आलम, रमेश गिरी, हबीबु रहमान, नजमुल्ला खातून, मंजय कुमार, अबरार आलम, आशीष कुमार, मुन्ना कुमार,अब्दुल आलम, नसरुलाह, मसीहा आलम, राजू आलम आदि ने बताया कि विगत तीन दिन से बाघ के द्वारा नीलगाय के मारे जाने का मामला चल रहा है, लेकिन वन विभाग केवल अपना टीम लगाकर अपनी ड्यूटी की जिम्मेदारी निभा रहा है. वन विभाग को चाहिए कि बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में लिया कर छोड़ दे. बाघ के द्वारा नीलगाय को मारने के मामले के बाद और कौड़ेना नदी के तट पर गन्ने के खेतों में बाघ का ट्रेस मिलने के बाद हम सभी ग्रामीण काफी दहशत में है. कौड़ेना नदी के तट पर के खेतों में धान की खेती प्रभावित हो रही है. बाघ के डर से धान की फसलों की निकौनी नहीं हो पा रही है. वहीं जो धान रोप दिये गये हैं. उसमें यूरिया खाद का छिड़काव नहीं हो पा रहा है. ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघ का सफल रेस्क्यू करने ने की मांग की है. ताकि लोगों में दहशत का माहौल खत्म हो जाये. जिससे लोग बिना डर भय के अपने खेतों की ओर जा सकें. उधर मंगुराहा वन रेंजर सुनील पाठक ने बताया कि वन विभाग का प्रयास हैं कि बाघ सुरक्षित जंगल की ओर लौट जायें, वन विभाग आश्वस्त भी है कि बाघ अपने द्वारा मारे गये नीलगाय को खाने के बाद जंगल की ओर लौट जायेगा. अगर बाघ को रेस्क्यू के नाम पर छेड़छाड़ किया जायेगा तो वह कहीं आक्रामक और खूंखार हो सकता है. जिससे आमजन और वन विभाग की परेशानी बढ़ सकती हैं. तीसरे दिन बाघ की निगरानी में लगे रहे वन के रैपिडिरिसपांस दल के कर्मी मैनाटांड़ . तीसरे दिन भी अपने द्वारा मारे गये नीलगाय के मांस को खाने के चक्कर में बाघ कौड़ेना नदी के तट के आसपास गन्ने के खेतों में अपना वास बनाये हुये हैं. मंगुराहा वन विभाग के रेंजर सुनील पाठक ने बताया कि वन विभाग के रैपिड रिस्पांस टीम के कर्मियों का दल बाघ की लगातार चौबीस घंटे निगरानी में लगे हुये हैं. बाघ के द्वारा मारे गये नीलगाय का चालीस प्रतिशत मांस खा लिया गया है. रेंजर ने बताया कि बाघ की निगरानी में लगाये गये टीम के द्वारा पता चला है कि मृत नीलगाय को बाघ सूखा जगह पर खींचकर ले गया है. नीलगाय का पूरा मांस खाने के बाद ही बाघ संतुष्ट होगा. बाघ को कोई डिस्टर्ब नहीं करें, बाघ कहीं आक्रामक न हो जाये. इसको लेकर चौबीस घंटे निगहबानी वन विभाग के द्वारा की जा रही है. रेंजर ने बताया कि बाघ अपने द्वारा मारे गये नीलगाय का पूरा मांस खाने के बाद निश्चित जंगल की ओर लौट जायेगा. बाघ के जंगल की ओर लौटने तक वन विभाग अलर्ट मोड में है. रैपिड रिस्पांस टीम के कर्मियों से लगातार संपर्क बनाया जा रहा है. बाघ के एक एक गतिविधियों पर पूरी नजर है. उन्होंने बताया कि लोगों को बाघ के वास की तरफ नहीं जाने दिया जा रहा है. वन विभाग के कर्मियों के द्वारा लोगों को अलर्ट कर दिया गया है. वन विभाग का पूरा प्रयास है कि बिना किसी परेशानी के बाघ जंगल की ओर लौट जायें. बाघ की निगरानी में रैपिड रिस्पांस दल प्रभारी मुकेश राम, केशव कुमार, पंकज ओझा, विपिन यादव, प्रकाश कुमार, इंद्रजीत यादव, गोलू कुमार, नवल कुमार बीन आदि लगे हुए हैं.

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