Bettiah : सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है मासिक पेंशन
Published by : MADHUKAR MISHRA Updated At : 22 Jun 2025 5:05 PM
मासिक पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है.
बेतिया . मासिक पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है. उक्त बातें मदर लालपरी गुप्ता हैंडिकैप्ड फाउंडेशन के सचिव अमित गुप्ता ने कहीं. वे रविवार को फाउंडेशन कार्यालय में दिव्यागजनों की बैठक को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आज का दिन अत्यंत हर्ष और गर्व का रहा, जब सरकार ने दिव्यांगजन, वृद्धजन एवं विधवा बहनों की मासिक पेंशन राशि 400 रूपये से बढ़ाकर 1100 रूपये कर दी है. बैठक में पूर्व निःशक्तता आयुक्त डॉ शिवाजी कुमार को धन्यवाद देते हुए कहा कि पूरे बिहार के दिव्यांग जनों को एकजुट कर पटना के गांधी मैदान में पेंशन वृद्धि की मांग को लेकर अडिग संघर्ष किया. साथ ही पश्चिम चंपारण के जिलाध्यक्ष आदित्य कुमार गुप्ता को भी, जो खुद दोनों पैर से दिव्यांग होने के बाद भी हौसला से बढ़ते रहे, जिन्होंने यह न केवल बताया कि हक की लड़ाई कैसे लड़ी जाती है, बल्कि स्वयं अपने उदाहरण से प्रेरित किया. वर्ष दर वर्ष, लगभग 15 वर्षों तक उन्होंने “आवेदन दो, पेंशन लो ” अभियान चलाया और यह साबित किया कि कलम और जनचेतना की ताकत से बड़ा कोई अस्त्र नहीं होता. साथ ही बिहार के उन सभी दिव्यांगजनों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस आंदोलन में भाग लेकर इसे जन आंदोलन का रूप दिया. हमारी संस्था लंबे समय से इस विषय पर जन जागरूकता, दस्तावेजी साक्ष्य और निरंतर संवाद के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाती रही है. आज जब यह मांग पूरी हुई है, तो हम सरकार का धन्यवाद करते हुए यह भी अनुरोध करते हैं कि इसे 100 रूपये प्रतिदिन के आधार पर जोड़ते हुए 3 हजार रूपये मासिक किया जाये. ताकि यह वाकई जीवन यापन सहायता भत्ता कहलाने योग्य हो. इसके अलावा हम एक और महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हैं. जिसमें राज्य सरकार की सरकारी भर्तियों में दिव्यांग आरक्षण का लाभ केवल बिहार के स्थानीय दिव्यांगजन को दिया जाएगा. अन्य राज्यों के दिव्यांगजन को सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों की तरह माना जाएगा. यह निर्णय स्थानीय दिव्यांग समुदाय के लिए एक बड़ा हक और संरक्षा है, और हम इसकी सराहना करते हैं.
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