आज सब आए हैं, कल कितने लोग याद रखेंगे?... जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए JCO सुजीत की पत्नी ने क्या कहा...

Sujeet Last Funeral
Martyred JCO Sujeet Kumar: जम्मू-कश्मीर के रामबन में सेना के वाहन हादसे में शहीद हुए बेगूसराय के जेसीओ सुजीत कुमार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. तिरंगे में लिपटे सुजीत के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी, वहीं परिवार ने गर्व और आंसुओं के बीच उन्हें विदा किया.
Martyred JCO Sujeet Kumar: जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में सेना के वाहन के खाई में गिरने से शहीद हुए बेगूसराय के अमरपुर निवासी जेसीओ सुजीत कुमार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो हजारों लोगों की भीड़ ने ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद अमर रहें’ के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी. हर आंख नम थी, लेकिन सुजीत की पत्नी सिंधु और तीनों बच्चों के चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था.
सुजीत कुमार की अंतिम यात्रा में शामिल हुए बिहार सरकार के मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार को ढांढस बंधाया. हालांकि शहीद की पत्नी सिंधु का सवाल सीधा था- “आज सब आए हैं, कल कितने लोग याद रखेंगे?”
“सुजीत मेरे लिए सिर्फ पति नहीं, मेरी ताकत थे”
शहीद की पत्नी सिंधु ने कहा, “वो बहुत अच्छे इंसान थे, दुनिया के सबसे अच्छे. मुझे उन पर गर्व है. आज वे शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन मेरे मन और दिल में हमेशा रहेंगे. उनकी शहादत ने मुझे हिम्मत दी है.” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि उनके बच्चों को सिविल सर्विस की तैयारी के लिए मदद दी जाए. “मेरे पति के बाद अब मेरे बच्चे ही मेरी दुनिया हैं,” उन्होंने भावुक स्वर में कहा.
बेटी संध्या का संकल्प- “एनडीए में अफसर बनकर दिखाऊंगी”
शहीद सुजीत की बेटी संध्या ने बताया कि उनके पापा हमेशा सेना की बातें करते थे. “उन्हें गर्व था कि मैं एनडीए जॉइन करना चाहती हूं. अब मैं पापा का सपना पूरा करूंगी. मैं एनडीए की तैयारी कर रही हूं और एक दिन सेना में अधिकारी बनूंगी.”

“फोन नहीं आया… तिरंगे में लिपटकर आ गए”
सुजीत कुमार ने 3 मई की सुबह अपने परिवार से बात की थी. पत्नी से कहा था, “पहुंचते ही फोन करूंगा.” लेकिन उस कॉल का इंतजार हमेशा के लिए अधूरा रह गया. रात होते-होते वह खबर आई, जिसने पूरे परिवार की दुनिया बदल दी.
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By Abhinandan Pandey
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