बेगूसराय में राशन कार्ड का बड़ा खेल, 1318 जीवित लोगों को कागजों पर घोषित किया ‘मृत’, काटा नाम

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नाम काटे गए लाभुक

Begusarai News: बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड में सरकारी तंत्र की एक बड़ी और हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है. यहाँ जनवितरण प्रणाली का लाभ ले रहे करीब 1318 जीवित और जरूरतमंद लोगों को कागजों पर ‘मृत’ घोषित कर उनका नाम राशन कार्ड की सूची से काट दिया गया है.

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Begusarai News: (डबलु कुमार की रिपोर्ट) बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में सरकार द्वारा संचालित जनवितरण प्रणाली में एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनहीन मामला प्रकाश में आया है. प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ों गरीब और जरूरतमंद लाभुकों को सरकारी कागजों में ‘मृत’ घोषित कर उनका नाम राशन कार्ड की आधिकारिक सूची से हमेशा के लिए विलोपित कर दिया गया है. इस तुगलकी कार्रवाई से क्षेत्र के प्रभावित लाभुकों में गहरा आक्रोश और नाराजगी व्याप्त है.

हैरानी और प्रशासनिक विफलता की पराकाष्ठा यह है कि जिन लोगों के नाम सूची से गायब किए गए हैं, वे सभी न केवल जीवित और तंदुरुस्त हैं, बल्कि इसी साल मई 2026 तक नियमित रूप से अपने संबंधित जनवितरण विक्रेता के यहाँ जाकर अंगूठा लगाकर राशन का उठाव भी करते रहे हैं. इस पूरे घालमेल का खुलासा तब हुआ जब जून 2026 का राशन लेने पहुंचे लाभुकों को डीलरों ने यह कहकर वापस लौटा दिया कि उनका नाम लिस्ट में नहीं है और ई-पॉश मशीन में उनके अंगूठे का निशान अब मैच नहीं हो रहा है.

बिना सत्यापन के बीएलओ ने बंद कमरे में तैयार की रिपोर्ट

प्रखंड के रानी पंचायत के रहने वाले मो. नईम, झुना देवी, राम नाथ महतो, अनिल साह, परमेश्वर महतो और मंजू देवी सहित दर्जनों पीड़ितों ने बताया कि प्रशासन द्वारा उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना, कारण बताओ नोटिस या जांच के सीधे मृत घोषित कर दिया गया है. जब परेशान और भूखे पीड़ित लाभुक प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के कार्यालय में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे, तो उन्हें अंदर की कहानी पता चली. अधिकारियों ने बताया कि बीएलओ द्वारा पूर्व में किए गए एक सर्वेक्षण और सत्यापन में इन सभी को मृत दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर जिला स्तर से इनका नाम राशन सूची से ब्लॉक किया गया है.

बछवाड़ा प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में अब तक कुल मिलाकर लगभग 1318 लोगों के नाम राशन कार्ड से काटे जा चुके हैं, जिनमें से 90 फीसदी से अधिक लोगों को सरकारी फाइलों में मृत दर्शाया गया है. स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ता विजय शंकर दास, उमेश कुंवर कवि, राजीव कुमार, राज कुमार चौधरी, सरिता राय, नलनी रंजन कुमार और अवधेश कुमार आदि ने इसे बीएलओ की घोर लापरवाही, मनमानी और बिना फील्ड में जाए बंद कमरे में रिपोर्ट तैयार करने का नतीजा करार दिया है.

लापरवाही के मुख्य बिंदु:

  • प्रखंड की विभिन्न पंचायतों के 1318 कार्डधारियों का नाम काटा गया.
  • मई 2026 तक सभी जीवित लाभुकों ने लिया था नियमित राशन.
  • बिना किसी फिजिकल वेरिफिकेशन के बीएलओ ने लोगों को बताया मृत.
  • जून 2026 में राशन दुकानों पर ई-पॉश मशीन ने अंगूठा लेने से किया इंकार.

एसडीओ ने क्या है?

जीवित लोगों को कागजी तौर पर मार दिए जाने के इस गंभीर और संवेदनशील मामले के तूल पकड़ने के बाद अनुमंडल पदाधिकारी, तेघड़ा राकेश कुमार ने आधिकारिक बयान जारी किया है. उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आया है. जिन भी वास्तविक लाभुकों का नाम तकनीकी त्रुटि या गलत सर्वे के कारण काटा गया है, वे प्रखंड कार्यालय में जाकर साक्ष्यों के साथ पुनः नया आवेदन जमा करें. अनुमंडल प्रशासन इसकी त्वरित स्थानीय स्तर पर जांच कराएगा और जांचोपरांत सभी पात्र व्यक्तियों का नाम वापस राशन कार्ड की सूची में जोड़कर सुचारु राशन सुनिश्चित किया जाएगा. बहरहाल, इस बड़ी चूक के कारण इस महीने सैकड़ों गरीब परिवारों के सामने अनाज का संकट खड़ा हो गया है.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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