काबर-बगरस नहर के पुनर्जीवन को लेकर जयमंगलागढ़ में बैठक, उड़ाही और बांध सुदृढ़ीकरण पर जोर

Published by : Vikas Jha Updated At : 07 Jun 2026 3:49 PM

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काबर-बगरस नहर के पुनर्जीवन को लेकर हुई बैठक

Begusarai News: बेगूसराय के जयमंगलागढ़ में काबर नहर नवजीवन अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया. इसमें काबर-बगरस नहर की नियमित उड़ाही, गाद सफाई, अतिक्रमण मुक्त करने और बांधों के सुदृढ़ीकरण पर विस्तार से चर्चा की गई.

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Begusarai News (विकास मिश्रा): बेगूसराय के प्रसिद्ध जयमंगलागढ़ स्थित नहर घाट पर रविवार को काबर नहर नवजीवन अभियान के तहत एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस विशेष बैठक की अध्यक्षता क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक महेश भारती ने की. बैठक में काबर-बगरस नहर के संरक्षण, पुनरुद्धार एवं इस पूरे क्षेत्र के समग्र विकास को लेकर उपस्थित प्रबुद्ध जनों द्वारा विस्तार से चर्चा की गई.

वर्तमान दयनीय स्थिति पर चिंता

बैठक को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए स्थानीय समाजसेवी एवं शिक्षक नीतेश रंजन ने काबर-बगरस नहर की वर्तमान दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए नहर की नियमित उड़ाही करने, दोनों किनारों के मिट्टी के बांधों के सुदृढ़ीकरण तथा नहर किनारे व्यापक स्तर पर पौधारोपण किए जाने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया. उनका कहना था कि नहर के पुनर्जीवन से क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी.

विकास की मुख्यधारा से जोड़ें

वहीं काबर टाल किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक वल्लभ बादशाह ने कहा कि काबर क्षेत्र को किसी भी प्रकार के टकराव से दूर रखकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की महती आवश्यकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय किसानों की जमीन पर जबरन कोई भी कार्रवाई उचित नहीं होगी. किसानों, मछुआरों और मजदूरों के मूल हितों को ध्यान में रखते हुए ही काबर क्षेत्र के समग्र विकास की मुकम्मल योजना बनाई जानी चाहिए.

नहर को अतिक्रमण मुक्त करें

उन्होंने काबर-बगरस नहर से सभी प्रकार के अवैध अतिक्रमण हटाने, वर्षों से जमा गाद की सफाई कराने तथा काबर से बगरस तक पूरे नहर क्षेत्र की साफ-सफाई सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है. जबकि अपने अध्यक्षीय संबोधन में महेश भारती ने नहर के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि काबर-बगरस नहर का निर्माण वर्ष 1951 से 1956 के बीच लगभग 15 लाख रुपये की लागत से कराया गया था.

ऐतिहासिक महत्व को बचाने का संकल्प

करीब साढ़े आठ किलोमीटर लंबी और 11 फीट गहरी यह नहर कभी समूचे इलाके के लिए जीवनदायिनी साबित हुई थी. लेकिन आज उपेक्षा, अतिक्रमण और रखरखाव के घोर अभाव में यह नहर अपनी वास्तविक उपयोगिता खोती जा रही है. जगह-जगह बाड़ लगाकर जल प्रवाह को बाधित कर दिया गया है. बैठक में अजय पाठक, आर्यन राज, धर्मेंद्र यादव, सरबू सदा तथा संजय सहनी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग मुख्य रूप से उपस्थित थे.

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