वीरपुर. सोमवार को प्रखंड कार्यालय वीरपुर के प्रांगण में खेग्रामस-भाकपा माले ने अपने सात सूत्री मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया. कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भीषण शीतलहर के बीच जब सरकार गरीब और बेघर लोगों को राहत देने की जिम्मेदारी निभाने में विफल थी, तब नीतीश-मोदी सरकार ने दलित-गरीबों की बस्तियों पर बुलडोजर चला कर उन्हें खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर किया. खेग्रामस के जिला सचिव चंद्रदेव वर्मा ने कहा कि बिहार में दशकों से बस चुके दलित-गरीब परिवारों को पीपीएच एक्ट 1948 के तहत पर्चा मिलना चाहिए था, लेकिन नीतीश सरकार ने जमींदार-कॉरपोरेटपरस्त सोच के आगे घुटने टेकते हुए गरीबों के संवैधानिक अधिकारों को नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर बिना वैकल्पिक व्यवस्था के घर उजाड़ना सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और संविधान दोनों का उल्लंघन है. धरने में माले ने केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला किया. वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा जैसे गरीबों के रोजगार गारंटी कानून को कमजोर किया जा रहा है, मजदूरी बढ़ाने और समय पर भुगतान जैसे बुनियादी अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है. मोदी सरकार ने ऐतिहासिक मजदूर संघर्षों से हासिल अधिकारों को समाप्त कर मालिकपरस्त चार लेबर कोड थोप दिये हैं. धरने के बाद माले के प्रतिनिधिमंडल ने सीओ और बीडीओ के माध्यम से डीएम को सात सूत्री ज्ञापन सौंपा. इस अवसर पर किसान महासभा के जिला सचिव बैजू सिंह, भाकपा माले नेता गौडी पासवान, अरविंद, प्रमोद पोद्दार, उपेंद्र पासवान, जयजयराम पासवान, अरुण राम और वैद्यनाथ महतो सहित अन्य नेता उपस्थित थे.
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