चुनाव आयोग ने जारी की बंगाल के वोटरलिस्ट की हार्ड कॉपी, वोटर अभी ऑनलाइन सर्च नहीं कर पाएंगे अपना नाम

Voter list 2026 west bengal: वोटरलिस्ट का मतदाता बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, क्योंकि हर मतदाता यह जानना चाहता है कि उसे इस बार चुनाव में मतदान का अधिकार मिलेगा या नहीं.
Voter list 2026 west bengal: चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद की मतदाता सूचियों को प्रकाशित करना शुरू कर दिया है. आयोग ने अभी बंगाल के विभिन्न जिलों की मतदाता सूचियों की हार्ड कॉपी जारी की है, ऑनलाइन सूचियां अभी उपलब्ध नहीं हैं. सबसे पहले बांकुड़ा जिले की वोटरलिस्ट प्रकाशित की गई है.
आयोग ने यह सूचना पहले ही दे दी थी कि शनिवार को वोटरलिस्ट जारी होगा. अभी यह जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है कि इस वोटरलिस्ट में उन लोगों के नाम हैं या नहीं जिनके नाम पर माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने सवाल उठाए थे. बंगाल में एसआईआर का काम अक्टूबर–नवंबर के महीने में शुरू हुआ था, लेकिन विवाद शुरू हुआ फरवरी महीने में जब चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों पर सवाल उठा दिये जिसकी वजह से वे न्यायिक समीक्षा में चले गए हैं.
जबतक वोटरलिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होगा यह बता पाना मुश्किल है कि इन 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की समीक्षा हुई या नहीं और वे इस चुनाव में मतदान कर पाएंगे या नहीं.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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