Begusarai News : सरकारी स्तर पर धान की खरीद नहीं होने से नाराज किसानों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू

रुदौली पंचायत के किसानों ने बुधवार को धान की सरकारी खरीद समेत अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी.
बछवाड़ा. प्रखंड कार्यालय परिसर में रुदौली पंचायत के किसानों ने बुधवार को धान की सरकारी खरीद समेत अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी. किसानों के समर्थन में पंसस मिथिलेश कुमार उर्फ ओमप्रकाश पहुंचे और उन्होंने किसानों को अपना समर्थन देने की घोषणा की. किसानों ने बताया कि धान की फसल तैयार हो जाने के बावजूद स्थानीय पैक्स द्वारा पंचायत में धान खरीदने से मना किया जा रहा है, जिससे उन्हें बिचौलियों के माध्यम से औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. भूख हड़ताल पर बैठे किसान शीलवंत कुमार, अवध किशोर चौधरी, अजीत कुमार चौधरी, शुभम कुमार, श्याम कुमार, अशोक ईश्वर, चन्द्र नारायण चौधरी, पप्पु ईश्वर, नंदन सहनी, राम नाथ ईश्वर, मंजीत कुमार, यशवंत कुमार आदि ने कहा कि मेहनत करके उगाई गई फसल को बेचने में सरकारी तंत्र सो जाता है. चुनाव में सरकार बड़े वादे करती है कि किसान की आय दोगुनी होगी, लेकिन आज किसान अपनी फसल बेचने के लिए सरकार को देने को तैयार हैं, फिर भी सरकारी खरीद नहीं हो रही है. किसानों ने प्रशासन से मांग की कि रुदौली पंचायत के सभी किसानों की धान अविलंब न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाये. उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में आ रही तकनीकी बाधाओं और बिचौलियों के हस्तक्षेप को तुरंत खत्म किया जाये और भुगतान की समय सीमा तय की जाये ताकि खाद-बीज का पुराना कर्ज चुकाया जा सके. किसानों ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय पदाधिकारी और जिला स्तर के अधिकारियों से लिखित शिकायत की, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है. धरना स्थल पर प्रखंड विकास पदाधिकारी को सूचना मिलने के बाद बीसीओ गौरांग कृष्ण करीब दो घंटे तक किसानों को समझाने पहुंचे, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे. उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक प्रशासन उनकी उपज को एमएसपी पर खरीदने की ठोस व्यवस्था नहीं करता, उनका आंदोलन जारी रहेगा. किसानों ने कहा कि अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन प्रखंड मुख्यालय के समक्ष धान जलाकर विरोध प्रदर्शन किया जायेगा. किसानों के इस आंदोलन से प्रखंड कार्यालय परिसर में कड़ी सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता बनाये रखी गयी है. यह आंदोलन स्थानीय प्रशासन और सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन गया है, क्योंकि किसान धान खरीद में हो रही अनियमितताओं और सरकारी उपेक्षा के खिलाफ पूरी दृढ़ता के साथ खड़े हैं.
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