जीना चाहती है बेगूसराय की मासूम रूही, 18 करोड़ के इंजेक्शन से बच सकती है जान, जानिए क्या है बीमारी

Published by :Abhinandan Pandey
Published at :27 Apr 2026 3:30 PM (IST)
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अस्पताल में मासूम रूही और परिजन

Bihar News: बेगूसराय जिले के पचंबा गांव की 16 महीने की मासूम रूही स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी (SMA) जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है. उसकी जान बचाने के लिए करीब 18 करोड़ रुपये के जीन थेरेपी इंजेक्शन की जरूरत है, जिसके लिए मां अंजलि कुमारी सरकार और समाज से मदद की गुहार लगा रही हैं.

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Bihar News: बेगूसराय जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत पचंबा गांव में एक परिवार इस समय बेहद कठिन हालात से गुजर रहा है. यहां रहने वाली अंजलि कुमारी अपनी 16 महीने की बेटी रूही की जिंदगी बचाने के लिए सरकार, समाज और मददगार हाथों से लगातार गुहार लगा रही हैं. छोटी सी उम्र में ही रूही एक ऐसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है, जिसने पूरे परिवार की दुनिया बदल दी है.

दुर्लभ बीमारी SMA से जूझ रही है मासूम

रूही को स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी (SMA) नाम की एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है. यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियों को कमजोर कर देती है. इसके कारण बच्चा बैठने, खड़े होने और चलने जैसी सामान्य एक्टिविटीज भी नहीं कर पाता. चिकित्सकों के अनुसार, यह बीमारी लगभग 10,000 बच्चों में से किसी एक को प्रभावित करती है.

सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण कुमार के मुताबिक, यह एक गंभीर न्यूरो-मस्कुलर डिसऑर्डर है, जिसमें समय के साथ स्थिति और भी बिगड़ती जाती है.

18 करोड़ के इंजेक्शन से ही बच सकती है जान

डॉक्टरों ने बताया है कि रूही की जान बचाने का एकमात्र विकल्प जीन थेरेपी इंजेक्शन Zolgensma है. यह इंजेक्शन एक बार दिया जाता है और इसके बाद मरीज की स्थिति में सुधार की संभावना रहती है. इसका सक्सेस रेट 92 से 95 प्रतिशत तक बताया गया है. लेकिन इस जीवन रक्षक इंजेक्शन की कीमत लगभग 17 से 18 करोड़ रुपये है, जो किसी भी सामान्य परिवार के लिए जुटाना लगभग असंभव है.

मां की दर्दभरी कहानी और टूटते सपने

रूही की मां अंजलि कुमारी बताती हैं कि उन्होंने अपनी बेटी के इलाज के लिए बेगूसराय से लेकर पटना तक कई बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाए. हर जगह इलाज के नाम पर भारी खर्च हुआ, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला.

अंजलि कहती हैं कि कई डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिना इस इंजेक्शन के बच्ची को बचाना मुश्किल है. परिवार ने कर्ज लेने की भी कोशिश की, लेकिन अब कोई भी आगे मदद करने को तैयार नहीं है.

समय तेजी से निकल रहा है

डॉक्टरों के अनुसार, रूही के इलाज के लिए अब केवल लगभग 6 महीने का समय बचा है. यह समय उसके जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे अहम अवधि मानी जा रही है. जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, परिवार की चिंता और बेचैनी बढ़ती जा रही है.

सरकार और समाज से उम्मीद

अंजलि कुमारी अब पूरी तरह सरकार, जनप्रतिनिधियों और समाज से मदद की उम्मीद लगाए बैठी हैं. उनका कहना है कि अगर समय रहते आर्थिक सहायता मिल जाए, तो उनकी बेटी की जान बचाई जा सकती है. हालांकि अब तक किसी बड़े एनजीओ या क्राउडफंडिंग अभियान की ठोस पहल सामने नहीं आई है. डॉक्टर और स्थानीय लोग अपने स्तर पर प्रयास जरूर कर रहे हैं, लेकिन जरूरत के मुकाबले यह नाकाफी साबित हो रहे हैं.

एक मासूम की मुस्कान पर मंडराता खतरा

जिस उम्र में रूही को खिलौनों से खेलना चाहिए और दुनिया को पहचानना चाहिए, वह अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रही है. मासूम की मुस्कान धीरे-धीरे फीकी पड़ती जा रही है. अब पूरा परिवार और गांव इस उम्मीद में है कि कोई आगे आएगा और समय रहते मदद करेगा, ताकि रूही को एक नई जिंदगी मिल सके.

(बेगूसराय से विकास मिश्रा की रिपोर्ट)

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लेखक के बारे में

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अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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