बेगूसराय में तलाक तक पहुंचे मुस्लिम जोड़े का समाज ने कराया दोबारा निकाह, हिंदू-मुस्लिमों ने मिलकर पेश की भाईचारे की नजीर
Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 22 May 2026 6:28 PM
इंसानियत की मिसल पेश करते लोग
Begusarai News: बेगूसराय के बलिया में दहेज में मोटरसाइकिल की मांग को लेकर तलाक और मुकदमों तक पहुंच चुके एक मुस्लिम जोड़े का सामाजिक पहल से दोबारा निकाह कराया गया. सीटू के अनुमंडलीय अध्यक्ष मो. खालिद की अगुवाई में हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर दोनों पक्षों को समझाया और आपसी विवाद को खत्म कराया. शुक्रवार को दोनों परिवारों की सहमति के बाद युवक-युवती का पुनः निकाह संपन्न हुआ, जिसे स्थानीय लोगों ने आपसी भाईचारे की बेहतरीन मिसाल बताया है.
Begusarai News(कृष्णा): बेगूसराय जिले के बलिया अनुमंडल क्षेत्र में शुक्रवार को इंसानियत, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की एक ऐसी अनोखी मिसाल देखने को मिली, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है. जहाँ दहेज विवाद और कड़वाहट के कारण पूरी तरह टूट चुके एक वैवाहिक रिश्ते को सामाजिक पहल, आपसी समझदारी और दोनों समुदायों के साझा प्रयास से दोबारा जोड़ दिया गया. नगर परिषद क्षेत्र स्थित सीटू (CITU) कार्यालय में कई दिनों की कड़ी मशक्कत और बातचीत के बाद यह प्रयास सफल हुआ, जिसके बाद काफी समय से अलग रह रहे युवक-युवती का एक बार फिर पूरे सम्मान के साथ निकाह कराया गया.
दहेज में बाइक की मांग से शुरू हुआ था विवाद, कोर्ट-कचहरी तक पहुंचा मामला
मामले के संदर्भ में मिली जानकारी के अनुसार, बलिया के लखीमिनियां की रहने वाली एक युवती का विवाह कुछ समय पूर्व हुआ था. शादी के बाद ससुराल पक्ष द्वारा कथित तौर पर दहेज में मोटरसाइकिल की मांग की जाने लगी, जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद धीरे-धीरे गहरा गया. आरोप है कि बाइक की मांग पूरी नहीं होने पर मामला इस कदर बिगड़ गया कि दोनों के बीच तलाक की नौबत आ गई और रिश्ता टूट गया. तलाक हो जाने के बाद पीड़ित युवती और उसके परिजनों को न्याय के लिए लंबे समय तक थाने, पुलिस और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़े. कानूनी लड़ाइयों के इस दौर में दोनों परिवारों के बीच के रिश्ते बेहद कड़वे और शत्रुतापूर्ण हो चुके थे.
सीटू अध्यक्ष की पहल पर एकजुट हुआ समाज, हिंदू-मुस्लिमों ने मिलकर सुलझाया विवाद
जब कानूनी रास्तों से भी बात बनती नहीं दिख रही थी, तब सीटू के अनुमंडलीय अध्यक्ष मो. खालिद ने इस टूटते परिवार को बचाने का बीड़ा उठाया. उन्होंने मामले को सामाजिक स्तर पर सुलझाने के लिए दोनों परिवारों से संपर्क साधा. मो. खालिद के नेतृत्व में सीटू के पदाधिकारियों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने दोनों पक्षों को एक मेज पर लाने का प्रयास किया. इस पूरी मध्यस्थता की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही समुदायों के स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की. कई दौर की लंबी बैठकों और दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने के बाद, पुरानी कड़वाहट को भुलाकर दोनों परिवार एक बार फिर से रिश्ता जोड़ने पर राजी हो गए. इसके बाद शुक्रवार को युवक और युवती को विधिवत कलमा पढ़ाकर उनका दोबारा निकाह संपन्न कराया गया.
बिखरने से बचा परिवार, सकारात्मक सोच की पूरे इलाके में सराहना
इस ऐतिहासिक निकाह के गवाह बने स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों ने इसे समाज में सकारात्मक सोच, आपसी सहयोग और भाईचारे की एक बड़ी जीत बताया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समाज के जिम्मेदार लोग इसी तरह आगे बढ़कर टूटते हुए रिश्तों को बचाने का प्रयास करें, तो अनगिनत परिवारों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने और बिखरने से बचाया जा सकता है. सीटू कार्यालय में संपन्न हुई यह अनूठी और मानवीय पहल इस समय पूरे बलिया प्रखंड में सराहना और चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है.
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