बेगूसराय. नगर निगम सभागार में सशक्त स्थाई समिति की बैठक महापौर पिंकी देवी की अध्यक्षता में आयोजित की गयी. बैठक में उपमहापौर अनिता देवी,सभी सशक्त समिति सदस्य व नगर आयुक्त सोमेश बहादुर माथुर, उपनगर आयुक्त ओसामा इब्न मंसूर,नगर प्रबंधक राजीव रंजन सिंह,अभय कुमार निराला व नगर निगम के जेई व स्वच्छता पदाधिकारी भी शामिल थे. बैठक में गणतंत्र दिवस की तैयारियां, स्ट्रीट डाॅग को एनिमल बर्थ कंट्रोल 2003 के तहत सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन को धारातल पर उतारने से संबंधित योजनाओं, स्वच्छता सर्वे में बेगूसराय नगर निगम को बेहतर स्थान पाने के लिए योजनाओं पर विचार,वृद्ध आश्रय स्थल व एक आकस्मिक कर्मी के सेवा विस्तार पर विस्तृत रुप से चर्चा की गयी. नगर निगम सशक्त समिति की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णयों पर पर स्वीकृति मिली.स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 को लेकर पार्षदों के बीच कार्यशाला का निर्णय भी लिया गया है.बैठक में स्वच्छता को बेहतर करने के लिए झाड़ू की खरीद, डस्टबीन की खरीद, सार्वजनिक शौचालयों को मरम्मती करने आदि पर गहराई से विचार हुआ. मौके पर स्वच्छता से संबंधित विभिन्न सामग्रियों की व्यवस्था में कुछ कर्मियों की लापरवाही पर भी सवाल उठ गया.जमीन की उपलब्धता नहीं होने के बजह से वृद्धजन आश्रय स्थल के 26 दिसंबर 2024 से बकाया किराया के भुगतान पर चर्चा हुई. नगरनिगम क्षेत्र में पूर्व की तरह धूमधाम से गणतंत्र दिवस समारोह मनाने का निर्णय लिया गया. एनीमल बर्थ कंट्रोल एक्ट के तहत स्ट्रीट डाॅग के लिए आश्रय स्थल,भोजन, टीकाकरण, बंध्याकरण आदि पर आने वाले तत्कालीन संभावित खर्च को भी बैठक में स्वीकृति दी गयी. बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र में कुत्तों की अनुमानित संख्या लगभग 17000 माना गया है. नगर निगम प्रशासन द्वारा प्रत्येक वार्ड में कम-से-कम एक डाॅग फीडिंग सेंटर संचालित किया जाएगा.इस तरह से कुल 45 फींडिंग सेंटर बनाए जाएंगे. इसके साथ साथ प्रत्येक जिला मुख्यालय नगर निकाय में पशु चिकित्सालय या निजी एंजेसी के सहयोग से एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का अधिष्ठापन एवं उसके क्रियान्वयन किया जाना है. कुत्तों के लिए डाॅग पाउंड्स आश्रय स्थल का भी स्थापना करना है.
शहर में दो एकड़ जमीन पर बनेगा भटकते कुत्तों का आश्रय स्थल
बैठक में कम से कम दो एकड़ भूमि को चिन्हित करने का बैठक में निर्णय लिया गया है. नगर निगम क्षेत्र में एक कुत्तों का आश्रय स्थल बनाना है.साथ ही कुत्तों का सर्वेक्षण करने, कुत्तों को पकडने, कुत्तों का बंध्याकरण करने, टीकाकरण करने के लिए दो टीम बनाई जाएगी. जिसमें आठ- आठ की संख्या में कुल 16 मानव बल की आवश्यकताएं होगी. मानव बल पर प्रति माह एक लाख की राशि खर्च होगी. साथ ही दो डाॅग पकड़ने वाला वाहन व जाल पर 25 लाख रुपये मासिक खर्च होंगे.साथ ही दवाएँ, सुई, पशु विशेषज्ञ चिकित्सक आदि पर दो लाख रुपए तथा टीकाकरण पर भी दो लाख रुपए प्रति माह का तत्कालीन संभावित खर्च को बैठक में रखा गया.साथ ही कुत्तों के लिए आश्रय स्थल पर वार्ड वार अनुमानित व्यय 3.5 लाख का खर्च भोजन पर रखा गया है. एक नियंत्रण कक्ष भी बनेगा जिसमें तीन की संख्या में मानव बल को रखना पड़ेगा.साथ ही रेबीज संक्रमित/आक्रामक प्रवृत्ति के कुत्तो के लिए अलग से आश्रय गृह का भी अधिष्ठापन करना है. उक्त सभी कार्य भारत सरकार द्वारा अधिसूचित एनिमल बर्थ कंट्रोल एक्ट के तहत करना है. विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रीट डाॅग को लेकर स्वत: संज्ञान लेकर निर्देश जारी किया है.जिसका लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है.
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