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शर्म का त्याग वैभव का विनाशक : जीयर स्वामी

Updated at : 01 May 2019 6:12 AM (IST)
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शर्म का त्याग वैभव का विनाशक : जीयर स्वामी

बिक्रमगंज : प्रखंड के सेमरा में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा सह ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन अपने प्रवचन में श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि मानव के लिए शर्म का त्याग वैभव का विनाशक होता है. वर्तमान परिवेश में महिला व पुरुष द्वारा उपयोग में लाये जा रहे परिधान शर्म विहीन व्यक्तियों का […]

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बिक्रमगंज : प्रखंड के सेमरा में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा सह ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन अपने प्रवचन में श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि मानव के लिए शर्म का त्याग वैभव का विनाशक होता है. वर्तमान परिवेश में महिला व पुरुष द्वारा उपयोग में लाये जा रहे परिधान शर्म विहीन व्यक्तियों का परिचायक है. वस्त्र हमारे संस्कृति, मर्यादा व संस्कार का परिचायक होता है.

वर्तमान में मनुष्य विचित्र परिधान धारण कर स्वयं के एडवांस होने का परिचय देता है. इससे मानवतावादी विचारों पर कुठाराघात हो रहा है, जिससे स्वयं को बचाये रखना आवश्यक है. स्वामी जी महाराज ने कहा कि जिस तरह से सूर्योदय होने पर स्वत: अंधियारा दूर होना शाश्वत सत्य है. उसी तरह मानव के मन मस्तिष्क में घर कर बैठे नास्तिक स्वरूप अंधियारा कथा के श्रवण से स्वत: दूर हो जाता है.
सनातन धर्म को सृष्टि उत्पत्ति के समय से अस्तित्व में होने की बात बताते हुए सनातन को विश्व के प्रथम धर्म होना बताया. कहते हैं कि अधर्मी भी नहीं चाहता की मेरे पुत्र-पुत्री अधर्म के रास्ते पर चलें. यही सनातन का परिचय है. अथार्त हमारे तन में समाहित सद्गुण सनातन है. युग की गणना को समझाते हुए उन्होंने कलियुग का समय चार लाख बत्तीस हजार वर्ष बताया.
कहा कि जिसमें दो से गुणा करने पर द्वापर, तीन से गुणा करने पर त्रेता व चार से गुणा करने पर प्राप्त वर्षों की संख्या को सतयुग का काल होता है, जिसमें इकहत्तर से गुणा करने पर एक मनु का शासनकाल होना व 14 मनु शासकों के शासनकाल को ब्रह्मा जी के एक दिन होता है. व्यक्ति के बड़प्पन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ धन संपत्ति अर्जित कर लेना बड़प्पन नहीं होता.
भक्ति, साधना, आराधना, ज्ञान, बैराग, प्रेम व सदाचारी प्रवृत्तिवाले व्यक्ति को धरा धाम पर सबसे बड़ा होता है. आचरणहीन व्यक्ति के द्वारा किये गये अनुष्ठानों से उनका शुद्धिकरण नहीं होता है. यज्ञ समिति के अध्यक्ष रामेश्वर पांडेय, सचिव अखिलेश्वर पांडेय, कोषाध्यक्ष बद्री नारायण पांडेय, व्यवस्थापक उमेश पांडेय, रवि शंकर दुबे, शशि शंकर पांडेय सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया.
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