कटोरिया में भक्तों ने श्रद्धा के साथ सुनी बृहस्पतिवार व्रत कथा, केला-वृक्ष के पास की पूजा-अर्चना

Edited by AMIT KR SINHA
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बृहस्पतिवार व्रत कथा सुनती महिलाओं की सांकेतिक तस्वीर.

Thursday Vrat Katha devotion: भक्ति और आस्था का ऐसा दृश्य जहां मंदिरों में गूंजती व्रत कथा और केला वृक्ष के नीचे श्रद्धालुओं की पूजा ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया.

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कटोरिया (बांका) से दीपक चौधरी की रिपोर्ट

Thursday Vrat Katha devotion: बांका जिले के कटोरिया और आसपास के क्षेत्रों में बृहस्पतिवार के दिन ठाकुरबाड़ी और विष्णु मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. महिलाओं, पुरुषों और युवतियों ने बृहस्पतिवार व्रत कथा का श्रवण कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला.

मंदिरों में गूंजा व्रत कथा का पाठ

गुरुवार को ठाकुरबाड़ी और विष्णु मंदिरों में श्रद्धालुओं ने बृहस्पतिवार व्रत कथा का श्रवण किया. कथा के दौरान धार्मिक माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया. श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक कथा सुनकर भगवान बृहस्पति से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की. मंदिर परिसर में घंटियों की ध्वनि और भजन-कीर्तन से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा.

केला वृक्ष के पास विशेष पूजा-अर्चना

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र धारण कर केले के वृक्ष के समीप विशेष पूजा-अर्चना की. गुड़, चना दाल और मुनक्का अर्पित कर विधि-विधान से पूजा संपन्न की गई. मान्यता है कि केला वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

घरों में भी दिखी आस्था की झलक

केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि कई श्रद्धालुओं ने अपने घरों में भी केला वृक्ष या उसके प्रतीक के सामने पूजा की. लोगों ने भगवान विष्णु की तस्वीर स्थापित कर व्रत कथा का पाठ किया. परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की गई.

ठाकुरबाड़ी और जमदाहा में रही भीड़

कटोरिया बाजार स्थित ठाकुरबाड़ी और जमदाहा ठाकुरबाड़ी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. सामूहिक आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया गया. कई श्रद्धालुओं ने पूरे दिन उपवास रखकर बृहस्पतिवार व्रत का पालन किया. मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति का माहौल बना रहा.

आस्था और परंपरा का संगम

यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा के जीवंत स्वरूप को भी दर्शाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बृहस्पतिवार व्रत को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है और इसे परिवार की खुशहाली से जोड़ा जाता है.

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