पुलिस की लापरवाही से हुई आगजनी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Jun 2016 3:05 AM (IST)
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विरोध मारपीट में मौत पर आक्रोशित लोगों ने शंभुगंज थाना में लगायी आग, वाहन फूंके शंभूगंज थाना क्षेत्र के कर्णपुर गांव में रास्ता विवाद को लेकर हुए मारपीट में जख्मी धीरेन्द्र कुमार की मौत होने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को कर्णपुर मोड़ पर रखकर शंभूगंज – इंगलिशमोड़ मार्ग को रविवार की सुबह जाम […]
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विरोध मारपीट में मौत पर आक्रोशित लोगों ने शंभुगंज थाना में लगायी आग, वाहन फूंके
शंभूगंज थाना क्षेत्र के कर्णपुर गांव में रास्ता विवाद को लेकर हुए मारपीट में जख्मी धीरेन्द्र कुमार की मौत होने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को कर्णपुर मोड़ पर रखकर शंभूगंज – इंगलिशमोड़ मार्ग को रविवार की सुबह जाम कर दिया. बाद में मृतक धीरेंद्र मंडल की जख्मी पत्नी की मौत की अफवाह पर सैकड़ों ग्रामीणों ने थाना परिसर में घुस कर थाना में आग लगा दिया. उग्र ग्रामीणों ने एक पुलिस जीप व बाइक भी फूंक दी तथा कागजात व फर्नीचर भी जला डाले. मौत की घटना के पीछे ग्रामीण पुलिस की लापरवाही बता रहे थे.
शंभुगंज : शंभुगंज थाना में रविवार को करीब साढ़े दस बजे हुए आगजनी के घटना के बाद खुद पुलिस ही सुरक्षा को लेकर घिर गयी है. हालांकि इस घटना के वक्त अगर शंभुगंज थाना की पुलिस सजग रहती तो शायद ये घटना नहीं होती. चूंकि सड़क जाम करने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने दो बार सैकड़ों की संख्या में आकर थाना के बाहर पुलिस प्रशासन पर रोड़े बाजी व नारेबाजी कर रहे थे
तो वहां के पुलिस पदाधिकारियों ने क्यों नहीं थाना का ग्रिल गेट बंद किया और क्यों नहीं वायरलेस रूम व थानाध्यक्ष कक्ष को बंद किया. अगर ग्रिल गेट बंद रहता और संतरी पर तैनात जवान गेट पर रहता तो शायद थाना में प्रदर्शनकारी प्रवेश नहीं कर सकते और न ही थाना में आगजनी की घटना की वारदात होती. जब सुबह पांच बजे से ही सड़क जाम था तो जिला मुख्यालय को सूचना देकर पुलिस बल के जवानों को क्यों नहीं मंगाया गया चाहे जो भी हो पर यहां भी एक बार पुलिस अपना रवैया पर घिरती नजर आ रही है जो जांच का विषय का है.
सात घंटा तक लगा रहा जाम
शंभुगंज. शंभुगंज बाजार में रविवार को कर्णपुर गांव के ग्रामीणों द्वारा मृतक धीरेंद्र कुमार की लाश को सड़क पर रखकर सड़क जाम करने की घटना में बाजार वासियों ने भी खुलकर सर्मथन किया. बाजारवासियों ने रविवार को स्वत: अपनी -अपनी दुकानें बंद रखा. सुबह पांच बजे से दिन के बारह बजे तक सात घंटा तक सड़क जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गयी. कितने ही जरूरतमंद लोगों की ट्रेन छूटी तो कितने ही यात्री
इस उमस भरी गरमी व चिलचिलाती धूप में गाड़ी में फंसे परेशान रहे. दिन भर बाजारों में भी लोग इस घटना के बाद पुलिस-प्रशासन के विरोध में नारे बाजी करते रहे लगभग सभी लोंगों के जुबान पर एक ही रट था कि अगर पुलिस सजग रहती तो शायद आज धीरेंद्र कुमार की दर्दनाक मौत नहीं होती.
जहां जाम के सात घंटे बाद घटना स्थल पर पहुंचे एसडीपीओ शशि शंकर कुमार व एसडीएम अविनाश कुमार ने आरोपी की गिरफ्तारी जल्द से जल्द करने, सरकारी नियमानुसार सहायता का लाभ देने और थानाध्यक्ष पंकज कुमार पासवान पर कार्रवाई करने के आश्वासन के बाद आक्रोशित लोग शांत हुए और सड़क जाम को हटाया तब जाकर लोगों और यात्रियों ने राहत की सांस ली.
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