शुल्क देकर भी नहीं मिलती पंखे की हवा

Published at :21 May 2016 4:01 AM (IST)
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शुल्क देकर भी नहीं मिलती पंखे की हवा

लापरवाही. प्लस टू स्कूलों में बच्चे देते हैं शुल्क हर तीन महीने पर स्कूल में ली जाने वाली फीस में सुविधाअों का चार्ज मिला होता है. इसमें पंखे की हवा के लिए भी शुल्क होता है. लेकिन स्कूलों में गरमी में ये सुविधा नहीं दी जा रही है. बांका : भीषण गरमी को देखते हुए […]

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लापरवाही. प्लस टू स्कूलों में बच्चे देते हैं शुल्क

हर तीन महीने पर स्कूल में ली जाने वाली फीस में सुविधाअों का चार्ज मिला होता है. इसमें पंखे की हवा के लिए भी शुल्क होता है. लेकिन स्कूलों में गरमी में ये सुविधा नहीं दी जा रही है.
बांका : भीषण गरमी को देखते हुए जहां आम आदमी इससे बचने के लिए तरह- तरह के उपकरण या पंखा वातावरण को ठंडा करने के लिए लगाते हैं. वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूल के बच्चे बिना पंखे के इस भीषण गरमी में पढ़ने के लिए मजबूर है. पूरे जिले के विद्यालयों को छोड़ दीजिए… सिर्फ जिला मुख्यालय के ही मात्र प्लस टू विद्यालय को ही ले लें तो इन विद्यालयों में छात्र- छात्राओं के लिए गरमी से राहत दिलाने के वास्ते किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है.
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब जिला मुख्यालय के पल्स टू विद्यालय की यह स्थिती है तो ग्रामीण क्षेत्र या प्रखंडों के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों की क्या स्थिति होगी. जिला मुख्यालय में तीन प्लस टू के विद्यालय हैं. तीनों विद्यालय में बिजली के कनेक्शन है लेकिन सिर्फ कहने मात्र को बिजली है. विद्यालय में सिर्फ प्राचार्य कक्ष एवं कार्यालय में ही बल्व एवं पंखे जलते हैं. जहां कक्षाएं चलती है जिसमें बैठ कर छात्र- छात्राएं पढ़ाई करते हैं.
वहां पर ना तो रोशनी के लिए बल्ब है और ना तो गरमी को दूर करने के लिए पंखे है. कुछ कक्षाओं में पंखे तो लटके हैं वो भी आदम जमाने के. कक्षाओं में पंखे है लेकिन सिर्फ देखने मात्र को. सभी कक्षाओं की बिजली वायरिंग लगभग खराब है. जिन कक्षाओं की वायरिंग की स्थिति ठीक है वहां के पंखे खराब पड़े हैं. हालांकि शहर के आरएमके उच्च विद्यालय के कुछ कक्षाओं में प्राचार्य के द्वारा नये पंखे लगाये गये है लेकिन कुछ कक्षाओं में आज भी पंखा विहीन है.
वहां पुराने पंखे आज भी लटके हैं. एसएस बालिका उच्च विद्यालय एवं एमआरडी उच्च विद्यालय के कक्षाओं में गरमी से निजात दिलाने के लिए पंखों का अभाव है. जिला मुख्यालय के उक्त तीनों प्लस टू विद्यालयों में आये दिन शिक्षा विभाग के द्वारा कुछ ना कुछ बैठके या सेमिनार होती रहती है. बैठकों में जिला प्रशासन के आलाधिकारी एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शिरकत करते हैं. बावजूद इसके इन अधिकारियों का ध्यान उक्त समस्या पर नही जाता है. विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र- छात्राओं से त्रैमासिक फीस भी ली जाती है. जिसमें बिजली शुल्क भी शामिल रहता है. छात्र- छात्राओं द्वारा शुल्क देने के बाद भी उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है.
दिखाने का पंखा
शहर के प्लस टू स्कूलों में बिजली रहते कक्षाओं में नहीं हैं पंखे
पंखा शुल्क देकर भी गरमी से बेहाल हो रहे स्कूलों के छात्र – छात्राएं
कहते हैं डीइअो
जिला मुख्यालय के प्लस टू स्कूलों की कक्षाअों में पंखा नहीं होना दुखद है. मैं स्वयं इस पहलू की जांच करूंगा. मेरी कोशिश रहेगी कि शहर के सभी प्लस टू स्कूलों व अन्य हाइस्कूलों में भी छात्र-छात्राअों को पंखा सहित सभी तरह की सुविधाएं प्राप्त हो.
-अभय कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी, बांका
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