जल नहीं, पी रहे हैं जहर

Published at :28 Sep 2015 4:11 AM (IST)
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जल नहीं, पी रहे हैं जहर

आर्सेनिकयुक्त पानी पीकर हरणा-बुजुर्ग गांव के लोग हो रहे हैं नि:शक्त , इस समस्या की ओर नहीं जा रहा है किसी का ध्यान, अब तक 50 व्यक्ति हो चुके हैं नि:शक्त बांका : रजौन प्रखंड क्षेत्र का एक ऐसा गांव जहां राह चलते आपको नि:शक्त व लाठी के सहारे चलने वाले दर्जनों लोग मिल जायेंगे. […]

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आर्सेनिकयुक्त पानी पीकर हरणा-बुजुर्ग गांव के लोग हो रहे हैं नि:शक्त , इस समस्या की ओर नहीं जा रहा है किसी का ध्यान, अब तक 50 व्यक्ति हो चुके हैं नि:शक्त

बांका : रजौन प्रखंड क्षेत्र का एक ऐसा गांव जहां राह चलते आपको नि:शक्त व लाठी के सहारे चलने वाले दर्जनों लोग मिल जायेंगे.
देखने से वे लोग आपको वृद्ध नहीं अपितु किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित लगेंगे. यह गांव है धाय-हरणा महगामा पंचायत अंतर्गत हरणा बुजुर्ग गांव. जहां गांव के खासकर पश्चिम टोले की आबादी आज भी इन समस्याओं से जूझ रही है. ग्रामीणों का मानना है कि इसका मूल कारण लाचार वश आर्सेनिक युक्त जल का सेवन है.
एक तरफ जहां सरकार सहित पीएचइडी विभाग बांका जिले में स्वच्छ व शुद्ध पेयजल की सुविधा मुहैया कराने के लिए कृत संकल्पित है, वही दूसरी ओर पीएचइडी विभाग के लोग पोस्टर व बड़े-बड़े होर्डिंग लगा कर सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की खानापूर्ति की जाती है और इसी के परिणाम स्वरूप हरणा बुजुर्ग गांव के लोग आज भी आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर है.
आर्सेनिक युक्त पानी होने की पुष्टि कोई ग्रामीण चिकित्सक नहीं अपितु ग्रामीण के साथ-साथ एआइएमएस दिल्ली के भी चिकित्सकों ने किया है. ग्रामीणों ने विकास यात्रा के दौरान रजौन के चकमुनियां में पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी इस समस्या से निजात दिलाने को लेकर आवेदन दिया था,
लेकिन आजतक स्थिति जस की तस है. गांव के प्राय: सभी चापाकल व कुएं की स्थिति एक जैसी है. इस गांव के लोग गैस्ट्रिक के शिकार होने के साथ ठेहुने के दर्द व विकलांगता से पीड़ित हैं. साथ ही गांव के प्राय: लोगों के दांत पीले हो गये हैं और कई लोग पेट दर्द के शिकार हैं.
क्या कहते हैं गांव के लोग
हरणा बुजुर्ग गांव के अली वर्दी हलालखोर, मो ईस्माइल, मो एहशानुल, मो सैफुल्ला, मो ताजउद्दीन, मो अब्दुर रहमान, मो बकीउद्दीन बताते हैं कि उनके गांव में पेयजल की स्थिति काफी खराब है. मजबूरी में वे ऐसे गंदगीयुक्त पानी पीते हैं गांव की आधी आबादी गैष्ट्रिक व ठेहुने के दर्द के शिकार हैं.
ग्रामीणों ने बताया कि ठेहुने के दर्द की शिकायत को लेकर जब गांव के ही सिद्दकी साहब दिल्ली ईलाज के लिए पहुंचे थे तो ठीक नहीं होने पर चिकित्सकों ने उनसे पेयजल के बारे में जानकारी ली.
सिद्दकी साहब ने अपने पेयजल के नमूने के साथ-साथ गांव के अलग-अलग जगह से पानी का सैंपल एआइएमएस के चिकित्सकों को पहुंचाया. चिकित्सकों ने जांच के क्रम में पाया कि गांव के एक चापाकल को छोड़ सभी जगहों के पानी को पीने लायक नहीं हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी : इस संबंध में मनोज कुमार चौधरी, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी ने बताया कि अगर पंचायत स्तर से भूमि उपलब्ध हो जाती है तो मिनी जलापूर्ति योजना वहां पर संचालित हो सकती है.
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