श्रावणी मेला को नहीं मिला राष्ट्रीय मेला का दर्जा

Published at :28 Aug 2015 6:39 AM (IST)
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श्रावणी मेला को नहीं मिला राष्ट्रीय मेला का दर्जा

अभय कुमार बेलहर : विश्व का सबसे लंबा तथा एक माह तक चलने वाले श्रावणी मेला को अब तक राष्ट्रीय मेला का दर्जा प्राप्त नहीं हो पाया है. भारत के इतिहास, रामायण युग से ही रावण के द्वारा स्थापित बैजनाथधाम में शिवलिंग की पूजा-अर्चना की जाती थी. रावण के बाद ऋषि मुनियों एवं देश-विदेश से […]

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अभय कुमार
बेलहर : विश्व का सबसे लंबा तथा एक माह तक चलने वाले श्रावणी मेला को अब तक राष्ट्रीय मेला का दर्जा प्राप्त नहीं हो पाया है. भारत के इतिहास, रामायण युग से ही रावण के द्वारा स्थापित बैजनाथधाम में शिवलिंग की पूजा-अर्चना की जाती थी. रावण के बाद ऋषि मुनियों एवं देश-विदेश से आये शिव श्रद्धालुओं द्वारा लगातार हर वर्ष सावन महीने में सुलतानगंज उत्तर वाहिनी गंगा से जल उठा कर देवघर बैजनाथ धाम में जलाभिषेक करने की परंपरा चलती आ रही है.
शिव श्रद्धालु कांवरिया के रूप में केसरिया वस्त्र धारण कर कांधे पर कांवर में गंगा जल लेकर तीन से पांच दिन तक पूर्व में 114 किलोमीटर एवं वर्तमान चार वर्ष से 105 किलोमीटर पैदल चल कर घंटों लाइन में खड़ा होकर पूजा अर्चना करके अपने – अपने घर वापस लौटते है. इस श्रावणी मेला से पूरे भारत के अलावे नेपाल, भुट्टान, मोरिसस आदि कई हिंदु देश से शिव भक्त प्रत्येक साल लाखों की संख्या में आते है. इसके साथ – साथ देश के बड़े – बड़े अधिकारी, मंत्री, राजनेता भी कांवरिया बन कर आते है और मेला में अपने बड़े – बड़े आश्वासन देकर चले जाते है, लेकिन किसी ने इस पर साकारात्मक कदम नहीं उठायी है न ही क्षेत्र के सांसद, विधायक, अधिकारी भी श्रावणी मेला के विकास एवं राष्ट्रीय मेला का दर्जा दिलाने का बड़ा-बड़ा सपना क्षेत्र के लोगों को हर वर्ष मेला के समय दिखा कर चले जाते है.
दो वर्ष पूर्व बांका के तत्कालीन जिलाधिकारी दीपक आनंद एवं प्रशिक्षु आइएएस मिथलेश मिश्रा ने इस ओर कारगर कदम उठा कर एक डोक्युमेंट्री बना कर श्रावणी मेला को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार के संबंधित विभाग को भेजा था, लेकिन उनके तबादले के बाद इसे आगे बढ़ाने का किसी ने प्रयास नहीं किया. हालांकि हर वर्ष करोड़ों रुपये इस मेला के व्यवस्था, सुरक्षा आदि में खर्च कर दिया जाता है. क्षेत्र के पूर्व धौरी मुखिया सुधीर सिंह, वर्तमान मुखिया चंदा देवी, साहबगंज के पूर्व मुखिया प्रमोद भगत मंटु, मंजु देवी, जिलेविया मोड़ क्षेत्र के घोड़बहियार पंचायत के मुखिया राज दुलारी देवी, अखिल भारतीय मानवाधिकारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पंडित नेताजी, राजद अध्यक्ष मनोज यादव, पूर्व शिक्षक उमेश सिंह, पंचायत समिति मनोज सिंह, कुमोद भगत, पूर्व प्रमुख अरुण साव, दिनेश सिंह आदि क्षेत्र के अनेकों लोगों ने श्रावणी मेला का राष्ट्रीय दर्जा अब तक हीं मिलने से मेला का सही विकास नहीं हो पाने की बात कहते हुए सरकार से इस ओर कारगर कदम उठाने की मांग की है.
क्या कहते हैं सांसद
बांका सांसद जय प्रकाश नारायण यादव से राष्ट्रीय दर्जा के संबंध में पूछे जाने पर बताया कि इस संबंध में मैने लोकसभा में प्रश्न रखा है तथा सरकार से इस पर यथा शीघ्र काम करने का अनुरोध किया है. इस क्षेत्र का एक विशाल मेला जिसे भारत सरकार अपने दायरे से हमेशा अलग रखा है, लेकिन अब हम इसके लिए लड़ाई ठान लिये है. लोकसभा के साथ हमने भारत सरकार गृह मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय एवं बिहार सरकार के संबंधित विभाग को पत्र लिख कर भी श्रावणी मेला को राष्ट्रीय मेला का दर्जा दिलाने की मांग किये है. उन्होंने बताया कि आज तक इस संबंध में किसी ने कोई प्रयास नहीं किया था. श्रावणी मेला को राष्ट्रीय मेला का दर्जा मिल जाने के बाद इस क्षेत्र के विकास में तेजी आयेगी तथा इसकी पहचान विश्व पटल पर होगा.
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