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भगवान शंकर के इस मंदिर को कहा जाता है बिहार का बाबाधाम, 300 साल पुराना है इतिहास

Updated at : 03 Jan 2025 6:39 PM (IST)
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बाबा गरीबनाथ का मंदिर

बाबा गरीबनाथ का मंदिर

Muzaffarpur: सावन के महीने में गरीबनाथ धाम श्रद्धालुओं के आस्था और श्रद्धा का केन्द्र रहा है. यहां आने वाले शिव भक्त ‘मनोकामनालिंग’ के तौर पर पूजा करते हैं.

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यूं तो देवाधिदेव महादेव के हजारों मंदिर आपकों देश भर में मिलेंगे. लेकिन उनके कुछ मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है. इसी में एक है बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित बाबा गरीबनाथ का मंदिर. जिन्हें बिहार का बाबाधाम भी कहा जाता है. यहां पूरे साल दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं. 

बिहार के बाबाधाम के नाम से हैं प्रसिद्ध 

बताया जाता है कि जब से झारखंड बिहार से अलग हुआ, तब से सबसे अधिक श्रद्धालु सावन महीने में यहां आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं. सावन के महीने में गरीबनाथ धाम श्रद्धालुओं के आस्था और श्रद्धा का केन्द्र रहा है. यहां आने वाले शिव भक्त ‘मनोकामनालिंग’ के तौर पर पूजा करते हैं. बताया जाता है यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करते हैं. यही कारण है कि बाब गरीबनाथ ‘मनोकामनालिंग’ के नाम से मशहूर हैं. सावन महीने में देवघर की तर्ज बाबा गरीबनाथ धाम में भी डाक बम लेकर जाते हैं और जलाभिषेक करते हैं. यहां पर कांवड़िया सोनपुर के पहलेज घाट से जल लेकर चलते हैं और 70 किमी दूरी तय कर बाब गरीबनाथ पर जलाभिषेक करते हैं. बताया जाता है कि यहां डाक बम गंगा जल लेकर महज 12 घंटे में बाब पर जलाभिषेक करते हैं.

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300 साल पुराना है इतिहास   

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा गरीबनाथ धाम का करीब तीन सौ साल पुराना इतिहास रहा है. मान्यता है कि पहले यहां पर घना जंगल था और इन जंगलों के बीच सात पीपल के पेड़ थे. बताया जाता है कि पेड़ की कटाई के समय खून जैसे लाल पदार्थ निकलने लगे और यहां से एक विशालकाय शिवलिंग मिला. लोग बताते हैं कि जमीन मालिक को बाब ने स्वपन में दर्शन दिया, तब से ही यहां पूजा-अर्चना हो रही है. 

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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