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हाइस्कूल डुमरी के खेल मैदान में अचानक कब्जा जमाने पहुंचे लोग

Updated at : 22 Oct 2024 9:24 PM (IST)
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हाइस्कूल डुमरी के खेल मैदान में अचानक कब्जा जमाने पहुंचे लोग

औरंगाबाद न्यूज : तीन दिनों से चल रहा था मकान निर्माण कार्य, हंगामा

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औरंगाबाद न्यूज : तीन दिनों से चल रहा था मकान निर्माण कार्य, हंगामा

औरंगाबाद/अंबा.

प्रखंड क्षेत्र के पल्स टू-हाइस्कूल डुमरी के खेल मैदान में भूमि विवाद उत्पन्न होने से दो पक्षों के बीच गतिरोध उत्पन्न हो गया है. मंगलवार को उस समय मामला तूल पकड़ लिया, जब कुछ लोग अनाधिकृत रूप से खेल मैदान में मकान निर्माण करने में जुट गये. वैसे तीन दिन पूर्व से खेल मैदान पर मिट्टी की भरायी करायी जा रही थी. इसके पश्चात ईंट व बालू आदि मेटेरियल्स इकट्ठा किये जाने लगे. तबतक ग्रामीण कुछ भी समझ नहीं सके. ग्रामीणों को ऐसा लगा कि हाइस्कूल के फील्ड की घेराबंदी होनी है. ठेकेदार की ओर से चहारदीवारी निर्माण कार्य शुरू किया जाना है. इधर, स्कूल के हेडमास्टर धनंजय कुमार भी हकीकत से अवगत नहीं हुए. इसी क्रम में 22 अक्तूबर को भूमिदाता के वंशज संतोष कुमार अचानक खेल मैदान पर जोर-शोर से मकान निर्माण का कार्य शुरू करा दिये. मकान निर्माण करते देख थोड़ी ही देर में खबर फैल गयी. कुछ ही देर में पल्स टू-हाइस्कूल डुमरी सहित आसपास के सैकड़ों ग्रामीण पहुंच गये और अवैध मकान निर्माण पर रोक लगा दी. इस दौरान दोनों तरफ से तू-तू, मैं-मैं भी हुई. इसके बाद जमकर हंगामा हुआ. शिक्षकों व स्कूली बच्चों ने भी बवाल काटा. विवाद गहराते देख कर कई गांवों से बुद्धिजीवी और समाजसेवी भी पहुंच गये. बुद्धिजीवियों ने दोनों पक्ष के लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया. इसके पश्चात सभी लोग सीओ कार्यालय अंबा पहुंचे. इस दौरान गांव के चंद्र प्रकाश गुप्ता, उपेंद्र प्रसाद, मनोज कुमार गुप्ता, विशाल राज, दिलीप पासवान समेत 77 लोगों ने संयुक्त हस्ताक्षर युक्त आवेदन सीओ चंद्रप्रकाश को उपलब्ध कराया. आवेदन में 24 अक्तूबर को आयोजित आमसभा में खेल मैदान को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए रणनीति तय करने का जिक्र किया है. इस दौरान ग्रामीणों को अधिकारियों को भी आमसभा में शामिल होने की अपील की है.

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार वर्ष 1962 में डुमरी हाइस्कूल की स्थापना करायी गयी थी. उस समय स्थानीय समाजसेवी रामवतार साव ने खेल मैदान के लिए खाता नंबर 26 में प्लॉट नंबर 422 रकबा 68 डिसमील भूमि राज्यपाल बिहार सरकार के नाम से रजिस्ट्रेशन के तहत दान की थी. इसके बाद से आज तक भूमि खेल मैदान के रूप में प्रयुक्त होती आयी है. यहां तक बिहार सरकार के कई मंत्रियों का हेलीकॉप्टर भी लैंड कराया जाता रहा है. इधर भूमिदाता के वंशज संतोष कुमार उक्त भूमि पर अपना कब्जा जमाना चाहते है.उनका कहना है कि भूमिदाता को सिर्फ अपने हिस्से जमीन दान करने का अधिकार है.खेल मैदान में 16डिसमील मेरा खतियानी रैयती जमीन है,जो 1960में व्यवहार न्यायालय गया द्वारा प्राप्त है.उस भूमि की रसीद भी कटती आ रही है.यहां तक कि सरकारी अमीन द्वारा पैमाईस कराकर सीमांकन भी कर दिया गया है.उन्होंने बताया कि निर्धारित भूमि पथ मकान निर्माण करने का मेरा कानूनी अधिकार प्राप्त है.

क्या बताते हैं अफसर

सीओ चंद्रप्रकाश ने बताया कि डुमरी हाइस्कूल के खेल मैदान की भूमि बिहार सरकार को दान के रूप में प्राप्त हुई है. भूमिदाता के परिजन गैर कानूनी रूप से खेल मैदान पर कब्जा जमाने का प्रयास किया है. इस मामले की तहकीकात कर विधि सम्मत कार्रवाई करने के लिए वरीय अधिकारियों को लिखा जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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