सहरसा के पंचायतों में पुस्तकालय योजना पर उठे सवाल, लाखों खर्च फिर भी किताबों और सुविधाओं का अभाव

सांकेतिक तस्वीर
Saharsa Library Scam: युवाओं और छात्रों को पढ़ाई के बेहतर अवसर देने के लिए शुरू की गई पंचायत पुस्तकालय योजना अब सवालों के घेरे में है. आरोप है कि लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन कई पंचायतों में न तो पुस्तकालय दिखाई दे रहे हैं और न ही छात्रों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं.
सौरबाजार सहरसा से छ.त्री कुमार की रिपोर्ट
Saharsa Library Scam: बिहार सरकार ने पंचायत स्तर पर छात्रों और युवाओं के अध्ययन की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से पुस्तकालय स्थापना की योजना शुरू की थी. इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पंचायत के मुखिया और पंचायत सचिव को सौंपी गई थी. लेकिन सहरसा जिले के सौरबाजार प्रखंड की कई पंचायतों में यह योजना कागजों तक सीमित रहने के आरोपों के कारण चर्चा में है. ग्रामीणों का दावा है कि पुस्तकालय के नाम पर राशि खर्च दिखाई गई, जबकि जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुविधाएं नहीं दिख रही हैं.
कागजों में पुस्तकालय, जमीन पर नहीं दिख रही सुविधाएं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई पंचायतों में पुस्तकालय भवन, फर्नीचर और पुस्तकों की खरीद के नाम पर लाखों रुपये की निकासी दिखाई गई है. हालांकि कई जगहों पर पंचायत सरकार भवन के एक कमरे को पुस्तकालय कक्ष के रूप में चिन्हित कर दिया गया, लेकिन वहां अध्ययन की समुचित व्यवस्था नहीं है.
ग्रामीणों का कहना है कि कई पुस्तकालय कक्षों में न पर्याप्त पुस्तकें हैं, न टेबल-कुर्सी और न ही नियमित संचालन की व्यवस्था दिखाई देती है.
गम्हरिया पंचायत का उदाहरण बना चर्चा का विषय
सौरबाजार प्रखंड के गम्हरिया पंचायत में पंचायत सरकार भवन के एक कमरे को पुस्तकालय कक्ष के रूप में दर्शाया गया है. स्थानीय लोगों के अनुसार वहां पुस्तकालय के नाम पर बेहद कम पुस्तकें रखी गई हैं, जिन पर धूल जमी हुई दिखाई देती है.
ग्रामीणों का दावा है कि अध्ययन करने आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त बैठने की व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है. कई लोगों को तो यह तक जानकारी नहीं है कि पंचायत में पुस्तकालय संचालित होने का दावा किया गया है.
युवाओं तक नहीं पहुंच पा रहा योजना का लाभ
पुस्तकालय योजना का उद्देश्य गांवों में अध्ययन का माहौल तैयार करना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संसाधन उपलब्ध कराना था. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जानकारी और सुविधाओं के अभाव में योजना का लाभ लक्षित वर्ग तक नहीं पहुंच पा रहा है.
इस कारण सरकार की महत्वाकांक्षी पहल का अपेक्षित प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई नहीं दे रहा है.
जांच की मांग, कार्रवाई की उम्मीद
मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से जांच की मांग की है. उनका कहना है कि योजना के तहत खर्च की गई राशि और उपलब्ध सुविधाओं का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए.
वहीं संबंधित अधिकारियों का कहना है कि यदि शिकायत प्राप्त होती है तो अभिलेखों और स्थल की जांच कराई जाएगी. जांच में अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










