घोषणाओं पर विश्वास नहीं करने के मूड में किसान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Mar 2014 2:20 AM

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देव(औरंगाबाद) : पिछले 26 वर्षो से राजनीतिक पार्टियों द्वारा हड़ियाही सिंचाई परियोजना को चालू कराने की राजनीति की जा रही है. लेकिन आज तक हड़ियाही सिंचाई परियोजना से किसानों के खेतों में सिंचाई के प्रबंध नहीं हो सकी. आज यही कारण है कि राजनीतिक पार्टियों से किसानों का मोह भंग हो चुका है. किसान इस […]

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देव(औरंगाबाद) : पिछले 26 वर्षो से राजनीतिक पार्टियों द्वारा हड़ियाही सिंचाई परियोजना को चालू कराने की राजनीति की जा रही है. लेकिन आज तक हड़ियाही सिंचाई परियोजना से किसानों के खेतों में सिंचाई के प्रबंध नहीं हो सकी. आज यही कारण है कि राजनीतिक पार्टियों से किसानों का मोह भंग हो चुका है. किसान इस बार के लोक सभा चुनाव में राजनीतिक पार्टी की घोषणाओं पर विश्वास नहीं कर प्रत्याशियों से अब तक किये कार्यो का लेखा जोखा मांगने के मूड में हैं.

किसान राम प्रवेश, श्याम बहादुर, आलोक सिंह, पंकज शर्मा ने बताया कि चुनाव प्रचार में आने वाले प्रत्याशियों व उनके समर्थकों से जवाब मांगा जायेगा कि अब तक आप ने किसानों के हीत के लिए क्या-क्या किया और आगे आप क्या करने वाले हैं. सभी में जिस का जवाब सही लेगा, किसान उसके साथ रहेंगे. उन्होंने बताया कि इस बार देव प्रखंड के दक्षिणी क्षेत्रों में खरीफ फसलों नहीं हुई. रबी फसल पर किसान बहुत बड़ी आस लगाये बैठे थे. वह भी बेमौसम बारिश होने के कारण खत्म हो गयी. इस बार बारिश के अभाव में प्रखंड के दुलारे, बरंडा रामपुर, बेढ़ना, एरौरा इन पंचायतों में एक कट्ठे में में भी धान की रोपनी नहीं हो पायी थी.

किसान के खेत बंजर की तरह खाली पड़े थे. किसानों ने इन सारे खेतों में गेहूं, चना,मसूर, अरहर, सरसो की फसल मुख्य रूप से लगायी थी, जो गेहूं की फसल बारिश के साथ -साथ तेज हवा के कारण खेतों में गिर जाने के कारण सूख गये. वहीं चना, मसूर, अरहर जैसे फसल में फल ही नहीं लग पाये. इसके कारण किसानों के समक्ष बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न हो गयी. कुछ किसान बैंक से कर्ज लेकर तो कुछ किसान बड़े-बड़े सेठ साहुकारों से कर्ज लेकर रबी फसल लगाये थे. आज उनके सामने सारी समस्या मुंह बायें खड़ी हो गयी. बच्चों की पढ़ाई की खर्च,सेठ साहुकारों का बोझ से दब कर आज अपनी जिंदगी चिंता में बिता रहे है. लेकिन नेता व उनके समर्थक किसानों के मदद के लिए कोई आगे नहीं आया. इस लिए सभी को सबक सिखाने के मूड में किसान हैं.

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