टेंडर फॉर्म भरने को लेकर भिडे ठेकेदार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Mar 2014 2:57 AM
औरंगाबाद (कोर्ट) : औरंगाबाद समाहरणालय में योजना व विकास विभाग में बुधवार को टेंडर फॉर्म जमा करने के दौरान दो संवेदकों के बीच जम कर मारपीट हुई. लगभग एक घंटे तक हुई झड.प की घटना से समाहरणालय परिसर रणभूमि में तब्दील रहा. संवेदकों ने एक-दूसरे को खदेड.-खदेड. कर डंडे से पीटा. इस घटना में दोनों […]
औरंगाबाद (कोर्ट) : औरंगाबाद समाहरणालय में योजना व विकास विभाग में बुधवार को टेंडर फॉर्म जमा करने के दौरान दो संवेदकों के बीच जम कर मारपीट हुई. लगभग एक घंटे तक हुई झड.प की घटना से समाहरणालय परिसर रणभूमि में तब्दील रहा. संवेदकों ने एक-दूसरे को खदेड.-खदेड. कर डंडे से पीटा. इस घटना में दोनों संवेदकों को गंभीर चोटें लगीं.
दोनों के बीच झड.प और हो-हंगामे को देखने के लिए पदाधिकारी से लेकर कर्मचारी तक अपने कार्यालय से बाहर आ गये. लेकिन इस दौरान बीच-बचाव करने न तो कोई पुलिस पदाधिकारी या अन्य पदाधिकारी आये और न ही समाहरणालय परिसर में सुरक्षा मुहैया कराने के लिए तैनात पुलिस के जवान ही आये. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, योजना एवं विकास विभाग में स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल के सभी 11 ग्रुपों के लिए टेंडर जमा लिया जा रहा था.
ग्रुप संख्या पांच के लिए गोपाल यादव टेंडर जमा करने के लिए पहुंचे, लेकिन वहां पहले से खडा छोटू नामक संवेदक ने यह कह कर उसका टेंडर फार्म व बैंक ड्राफ्ट छिन लिया कि वह काम उसके क्षेत्र का है. गोपाल यादव ने इसका विरोध किया तो उसके साथ छोटू व उनके समर्थकों ने मारपीट शुरू कर दी. इसके बाद वहां पहले से पडे एक डंडे को लेकर उक्त संवेदक को समाहरणालय परिसर में खदेड.-खदेड. कर पीटा. इससे समाहरणालय परिसर में भगदड. मच गयी.
वहीं कुछ देर के लिए योजना भवन में लिए जा रहे टेंडर का काम भी बाधित रहा. घटना की सूचना मिलते ही नगर थानाध्यक्ष संजय कुमार दल-बल के साथ समाहरणालय पहुंचे. लेकिन इसके पहले दोनों संवेदक समाहरणालय से निकल चुके थे. समाहरणालय परिसर में टेंडर फार्म जमा करने को लेकर संवेदकों ने जिस वक्त आपस में मारपीट की, उस वक्त जिलाधिकारी से लेकर कई विभागों के आला अधिकारी कार्यालय में मौजूद थे. लगभग एक घंटे तक संवेदक अपने हाथों में डंडे लेकर परिसर में भांजते रहे.
एक-दूसरे को खदेड.-खदेड. कर पीटते रहे, लेकिन इस दौरान उन्हें रोकने के लिए भी कोई नहीं पहुंचा. दोनों किसी का सुनने को तैयार भी नहीं थे. और न ही प्रशासन का ही डर इन्हें सता रहा था. यहां तक कि समाहरणालय परिसर के सुरक्षा में लगभग दो दर्जन पुलिस जवानों को तैनात किया गया है, वे तो दिखे तक नहीं. हालांकि इस मामले की शिकायत किसी थाने में दर्ज नहीं करायी गयी है.
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