जिला उद्योग केंद्र में चल रहा विवाद गहराया
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Feb 2014 5:39 AM
औरंगाबाद (कोर्ट) : जिला उद्योग केंद्र आज अपने ही महाप्रबंधक व कनीय सांख्यिकी सहायक के बीच उत्पन्न विवादों में उलझा हुआ है. महाप्रबंधक विमल कुमार व कनीय सांख्यिकी सहायक अशोक कुमार दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. विवाद इतना बढ़ गया कि मामला जिलाधिकारी तक पहुंच गया. जिलाधिकारी ने महाप्रबंधक द्वारा नौ जनवरी […]
औरंगाबाद (कोर्ट) : जिला उद्योग केंद्र आज अपने ही महाप्रबंधक व कनीय सांख्यिकी सहायक के बीच उत्पन्न विवादों में उलझा हुआ है. महाप्रबंधक विमल कुमार व कनीय सांख्यिकी सहायक अशोक कुमार दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. विवाद इतना बढ़ गया कि मामला जिलाधिकारी तक पहुंच गया. जिलाधिकारी ने महाप्रबंधक द्वारा नौ जनवरी को की गयी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कनीय सांख्यिकी सहायक से स्पष्टीकरण देने का निर्देश दे दिया गया.
दरअसल यह मामला बिजनेस रोस्टर को लेकर उत्पन्न हुआ है. महाप्रबंधक विमल कुमार ने जिलाधिकारी को दिये अपने पत्र में कहा है कि कनीय सांख्यिकी सहायक अशोक कुमार दुर्भावना से ग्रसित होकर अपशब्द का प्रयोग, नियमों का उल्लंघन व मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं. नौ जनवरी को जब कनीय सांख्यिकी सहायक को अपने कार्यालय क क्ष में निबंधित प्रतिष्ठानों का बिजनेस रोस्टर की सॉफ्ट कॉपी व हार्ड कॉपी उपलब्ध नहीं कराये जाने के बारे में पूछा, जिसकी अंतिम तिथि छह दिसंबर को ही थी, तो वे भड़क उठे. इसके बाद शोर गुल मचाने लगे. उनके द्वारा बार-बार यह कहा जाता रहा कि बिजनेस रजिस्टर तैयार है, लेकिन तैयार नहीं था. उच्चधिकारी के आदेश के बावजूद यह रोस्टर तैयार नहीं होने के कारण उन्हें उपलब्ध नहीं करा पाये.
महाप्रबंधक ने यह भी कहा है कि कनीय सांख्यिकी सहायक हमेशा टाल-मटोल करते आये हैं और हमेशा आदेशों का उल्लंघन करते हैं. यहां तक कि धमकी भरे शब्दों में शारीरिक क्षति पहुंचाने की भी बात करते हैं. इस मामले की शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने ज्ञापांक 296/गो. दिनांक- 5 फरवरी 14 के माध्यम से कनीय सांख्यिकी सहायक से स्पष्टीकरण पूछा है. सूत्रों की मानें तो उन पर आगे विभागीय कार्रवाई भी होने की संभावना जतायी जा रही है. इधर, कनीय सांख्यिकी सहायक अशोक कुमार ने स्पष्टीकरण का जवाब देते हुए कहा है कि वे बिजनेस रजिस्टर को ससमय तैयार कर उसका सॉफ्ट कॉपी व हार्ड कॉपी कार्यालय को उपलब्ध करा आये हैं. उन्हें मुकदमा में फंसाने की धमकी दी जाती है. महाप्रबंधक द्वारा अवैध पैसे की उगाही कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाता है.
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