झारखंड से चोरी-छिपे आ रही शराब

Published at :06 Apr 2016 6:57 PM (IST)
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झारखंड से चोरी-छिपे आ रही शराब

झारखंड से चोरी-छिपे आ रही शराब कारोबारी शराब के लिए वैकल्पिक रास्ते का ले रहे सहारा प्रतिनिधि 4 अंबा (औरंगाबाद) राज्य में पूर्ण शराबबंदी के बाद कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में शराब दुकानें तो बंद हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ शराब बनाने का धंधा भी बंद कराने का पुलिस द्वारा दावा किया है. लेकिन, ऐसा […]

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झारखंड से चोरी-छिपे आ रही शराब कारोबारी शराब के लिए वैकल्पिक रास्ते का ले रहे सहारा प्रतिनिधि 4 अंबा (औरंगाबाद) राज्य में पूर्ण शराबबंदी के बाद कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में शराब दुकानें तो बंद हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ शराब बनाने का धंधा भी बंद कराने का पुलिस द्वारा दावा किया है. लेकिन, ऐसा नहीं कि प्रखंड क्षेत्र में शराब निर्माण व बिक्री बिल्कुल बंद है, बल्कि लोग झारखंड की दुकानों से शराब खरीद कर पी रहे हैं. प्रखंड का महराजगंज बाजार झारखंड का सीमावर्ती क्षेत्र है, जहां से हरिहरगंज स्थित शराब की दुकान की दूरी करीब 500 मीटर है. यहां धड़ल्ले से शराब मिल रही है. हरिहरगंज के शराब व्यवसायियों को अभी दोगुना लाभ हो रहा है. शराब की बिक्री काफी बढ़ गयी है. शाम में शराब दुकान के सामने काफी भीड़ लग जाती है. हालांकि, महराजगंज से अंबा आनेवाले एनएच-139 पथ पर पुलिस की नजर है, लेकिन लोग वैकल्पिक रास्ते से शराब ला रहे हैं. हालांकि, अब तक बोर्डर एरिया के समीप चेकपोस्ट नहीं लगाया गया है. पूछने पर अंबा थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि एरका कॉलोनी के समीप चेकपोस्ट लगाया जाना है. फिलहाल, पुलिस का सर्च अभियान जारी है.शराबबंदी का असर मांस-मुरगा की बिक्री पर भी फोटो नंबर-10 – परिचय- सुनसान अंबा का मांस-मछली बाजार.प्रतिनिधि 4 अंबा (औरंगाबाद)शराबबंदी का असर कबाब (मांस-मुरगा) पर भी पड़ रहा है. अंबा के औरंगाबाद रोड स्थित मछली मार्केट में कभी काफी भीड़ रहती थी, लेकिन अब इक्के-दुक्के ग्राहक ही नजर आ रहे हैं. मांस-मुरगा की जिन दुकानों में ग्राहकों की लंबी कतार लगी रहती थी, वे आज सुनसान हैं. मांस व्यवसायियों ने बताया कि कई लोग दारू पीने के लिए चखने के रूप में मांस-मुरगा व मछली का उपयोग करते थे, पर शराबबंदी के बाद वे लोग नहीं आ रहे हैं, जिससे बिक्री प्रभावित होना लाजमी है. गौरतलब है कि अंबा का मछली मार्केट सतबहिनी मंदिर जानेवाले रोड के किनारे है. शराब पीनेवाले लोग वहीं पर मांस-मुरगा पक्का कर खाते थे, जिससे मंदिर जानेवाले श्रद्धालुओं को परेशानी होती थी. शराबबंदी के बाद उस स्थान पर मांस-मछली काफी कम मात्रा में पकाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी राहत मिली है.

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