न शोर गुल व न ही बैंड-बाजा, दहेजरहित विवाह का गवाह बना मौलाबाग सूर्य मंदिर

Published at :23 Nov 2015 7:01 PM (IST)
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न शोर गुल व न ही बैंड-बाजा, दहेजरहित विवाह का गवाह बना  मौलाबाग सूर्य मंदिर

न शोर गुल व न ही बैंड-बाजा, दहेजरहित विवाह का गवाह बना मौलाबाग सूर्य मंदिर ऑटो चालक ने थामा अनाथ निक्की का हाथ(फोटो नंबर-10) परिचय- नव दंपति को आशीर्वाद देते लोग दाउदनगर (अनुमंडल)दाउदनगर के तिवारी मुहल्ले के ऑटो चालक श्रवण तिवारी ने अनाथ आश्रम में रहनेवाली 19 वर्षीया निक्की कुमारी का हाथ थाम कर समाज […]

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न शोर गुल व न ही बैंड-बाजा, दहेजरहित विवाह का गवाह बना मौलाबाग सूर्य मंदिर ऑटो चालक ने थामा अनाथ निक्की का हाथ(फोटो नंबर-10) परिचय- नव दंपति को आशीर्वाद देते लोग दाउदनगर (अनुमंडल)दाउदनगर के तिवारी मुहल्ले के ऑटो चालक श्रवण तिवारी ने अनाथ आश्रम में रहनेवाली 19 वर्षीया निक्की कुमारी का हाथ थाम कर समाज में एक उदाहरण पेश किया है. दहेजरहित यह आदर्श विवाह दाउदनगर के मौलाबाग स्थित ऐतिहासिक सूर्य मंदिर में संपन्न हुआ, जहां न कोई शोर गुल था और न बैंड-बाजा. बराती बने स्थानीय जनप्रतिनिधि व ग्रामीण, जिन्होंने नवदंपती को आशीर्वाद दिया. जानकारी के अनुसार, श्रवण तिवारी ऑटो चलाने का काम करता है. जबकि निक्की कुमारी जन जागरण संस्था बाल आश्रम गया में रहती है. श्रवण ने अनाथालय प्रबंधन के समक्ष निक्की के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा. अनाथालय प्रबंधन ने उसके बारे में तरारी पंचायत के मुखिया निर्मला सिन्हा व दाउदनगर थाने से जानकारी ली. लड़के के बारे में आश्वस्त होने के बाद अनाथालय प्रबंधन ने विवाह के लिए सहमति प्रदान की और सोमवार को उसके प्रबंधक अशोक सिंह व उनके सहयोगी शोभा देवी निक्की को लेकर दाउदनगर पहुंचे. आदर्श विवाह के साथ निक्की को नया घर मिला. इस विवाह का साक्षी बना सूर्य मंदिर परिसर. गोरडीहा पंचायत के मुखिया भगवान सिंह, तरारी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि नागेंद्र कुमार, उपेंद्र तिवारी, मनोज यादव, हरेंद्र तिवारी समेत अन्य लोगों ने पहुंच कर नवदंपती को आशीर्वाद दिया और श्रवण के इस कदम की सराहना की. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न हुआ. महिलाओं ने गीत गाये.आठ साल बाद मिला नया आशियानाअनाथालय में रह रही निक्की को आठ साल बाद नया आशियाना मिला है. जन जागरण संस्था बाल आश्रम, गया के प्रबंधक ने बताया कि जब उसकी उम्र 11 वर्ष थी तो गया सिविल लाइंस थाने की पुलिस को गांधी मैदान के आसपास भटकते मिली थी. पुलिस ने उसे संस्था के हवाले कर दिया था. पता चला कि वह पटना जिले के मसौढ़ी की रहनेवाली है. उसकी मां की मौत हो चुकी है. पिता के पास वह जाना नहीं चाह रही थी,अब उसके पिता भी जीवित नहीं है. अनाथ आश्रम में रह कर ही वह साक्षर हुई और सिलाई-कढ़ाई सीखी. वहीं उसकी परवरिश हुई और वह अब नये जीवन का सपना संजोये पति के साथ ससुराल के लिए रवाना हुई.नौ लड़कियों की करायी शादी : प्रबंधक ने बताया कि संस्था में रहनेवाली नौ लड़कियों की अब तक शादी करायी जा चुकी है. रविवार को ही देव सूर्य मंदिर में नेहा कुमारी की शादी औरंगाबाद के शाहपुर निवासी सुजीत कुमार से करायी गयी. फिलहाल में आश्रम में सात लड़किया रह रही है. प्रबंधक ने बताया कि आश्रम में भुली-भटकी लड़कियों को रखा जाता है. उनके अभिभावकों का पता चल जाने पर अभिभावकों के हवाले कर दिया जाता है. जिन लड़कियों के अभिभावकों के बारे में जानकारी नहीं हो पाती उसका परवरिश आश्रम में की जाती है.

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