किसान-मजदूर को वेतन-पेंशन क्यों नहीं?

Published at :04 Nov 2015 6:57 PM (IST)
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किसान-मजदूर को वेतन-पेंशन क्यों नहीं?

किसान-मजदूर को वेतन-पेंशन क्यों नहीं?सीएम-पीएम से रालोसपा नेता का सवालहसपुरा. देश में जनप्रतिनिधियों को तमाम सुविधाओं के साथ वेतन-भत्ते पाकर भी पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करते ही पेंशन की जरूरत पड़ जाती है. देश की अर्थव्यवस्था यह भार उठाती भी है. तब भी, जबकि सबको पता है कि पांच वर्ष में ढेर सारे जनप्रतिनिधि […]

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किसान-मजदूर को वेतन-पेंशन क्यों नहीं?सीएम-पीएम से रालोसपा नेता का सवालहसपुरा. देश में जनप्रतिनिधियों को तमाम सुविधाओं के साथ वेतन-भत्ते पाकर भी पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करते ही पेंशन की जरूरत पड़ जाती है. देश की अर्थव्यवस्था यह भार उठाती भी है. तब भी, जबकि सबको पता है कि पांच वर्ष में ढेर सारे जनप्रतिनिधि वैध-अवैध तरीके से क्या-क्या करके अपना उल्लू सीधा कर चुके होते हैं. बाकी अन्य सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी नौकरी शुरू करने से लेकर नौकरी के लिए तय (अमूमन 18 वर्ष से 60-62 वर्ष तक) आयु सीमा पूरी करने की अवधि में काम करने के बदले वेतन पाने के पश्चात रिटायरमेंट पर पेंशन भी पा रहे होते हैं. कार्यकाल में वेतन के अतिरिक्त ढेर सारे अफसरों व कर्मचारियों की आय के अन्य अवैध स्रोत भी किसी से छिपे नहीं हैं. पूरा देश जानता है. इसके बावजूद 60-62 वर्ष की आयु तक वेतन लेने के बाद से ही इनकी भी पेंशन चालू हो जाती है. लेकिन किसानों व मजदूरों का क्या हाल है? जिन्हें किसान कहा जाता है, उनके लिए 18 वर्ष का होना तो दूर की बात होती है, अधिकतर तो अपना बचपन भी ठीक से नहीं जी पाये होते हैं. देश-समाज का पेट करने के लिए अनाज उपजाने की बेचैनी में उनका बचपन भी खेत-खलिहान में ही मिट्टी मिल जाता है. इसी दौरान 18 का होकर अनाज उपजाने के चक्कर में 60-62 तक तो पहुंच ही जाते हैं, उसके बाद भी सूखी-गीली मिट्टी से अनाज उगाने के लिए हड्डियां घिसते-घिसते 80-85 वर्ष तक की आयु सीमा भी पार करने लगते हैं. कहा जा सकता है कि मृत्युपर्यंत खेतों में ही इनकी जिंदगी बीत जाती है. लेकिन, ध्यान देने की बात है कि इनके लिए न तो हमारी व्यवस्था वेतन-भत्ता की जरूरत महसूस करती है और न ही उम्र के एक खास पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी इनके लिए पेंशन जरूरी मानी जाती है. पर, आखिर क्यों ? यह सब कब तक चलेगा? ऐसा क्यों चलना भी चाहिए? ये सवाल हैं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के प्रदेश संगठन सचिव कामता प्रसाद के. उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी और कई प्रमुख पार्टियों के प्रमुख नेताओं को पत्र भेज कर अपने सवाल उनके सामने रखे हैं.श्री प्रसाद ने सवाल किया है कि किसानों व मजदूरों को देश की राजनीतिक व्यवस्था कब तक धोखा देती रहेगी? यह व्यवस्था किसानों को सब्सिडी के नाम पर कब तक छलेगी, कब तक ठगेगी? किसानों की फसलों की क्षतिपूर्ति के नाम पर अफसरों को अवैध कमाई की सुविधा देने की योजना कब तक के लिए बनी है? रालोसपा नेता ने अपने पत्र में कहा है कि देश के किसानों व मजदूरों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. फिर भी क्या कारण है कि हमारे सांसद या विधायक देश की संसद व विधानसभाओं में किसानों के हक की बातें करने से परहेज करते हैं? उन्होंने यह भी पूछा है कि किसानों के लिए 60 वर्ष उम्र तक वेतन और इसके पश्चात पेंशन की व्यवस्था कब तक हो पायेगी?

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