खुद ही नशे में चूर, तो क्या करेंगे हुजूर

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मदनपुर : जिले के सबसे ज्यादा उग्रवाद ग्रस्त थानों में एक सलैया थाना है, जो चारों ओर से नक्सलियों के निशाने पर रहता है. इस थाने के कुछ ही दूरी पर नक्सलियों का चाल्हो जोन है. इसकी पहाड़ी 10 से 15 किलोमीटर में फैली है और इस पहाड़ी में सैकड़ों गुफाएं है, जिसमें नक्सली सुरक्षित […]

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मदनपुर : जिले के सबसे ज्यादा उग्रवाद ग्रस्त थानों में एक सलैया थाना है, जो चारों ओर से नक्सलियों के निशाने पर रहता है. इस थाने के कुछ ही दूरी पर नक्सलियों का चाल्हो जोन है. इसकी पहाड़ी 10 से 15 किलोमीटर में फैली है और इस पहाड़ी में सैकड़ों गुफाएं है, जिसमें नक्सली सुरक्षित रह कर आराम फरमाते हैं.

ऐसे में सलैया थाना को अपने आप को सुरक्षित रखते हुए आम लोगों की भी जान की हिफाजत करनी है, लेकिन जब थाने की पुलिस खुद एक दूसरे के साथ समन्वय स्थापित नहीं रखते हो और शराब का सेवन करने लगते हो, तो इस थाने की स्थिति क्या हो सकती है. इसका अंदाजा शनिवार की रात घटी घटना से ही लगायी जा सकती है.

लोगों को क्या देंगे सुरक्षा

यह अति उग्रवाद प्रभावित थाना के लिए दुर्भाग्य है कि थाने के प्रभारी ही शराब के नशे में रहते हैं. ऐसे में इनके प्रति यह कहावत पूर्ण रूप से चरितार्थ होती है कि जब खुद ही है नशे में चूर तो क्या करेंगे हुजूर. यानी कि जब थानाध्यक्ष ही नशे में चूर रहे तो वहां के लोगों को यह क्या सुरक्षा दे सकते हैं और नक्सलियों से कैसे जान माल की रक्षा कर सकेगें.

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