देखते-देखते ही आंखों के सामने मौत के गाल में समा गया अंकित
Updated at : 05 Sep 2019 9:11 AM (IST)
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औरंगाबाद /ओबर : ओबरा के गिरा में नहर में डूब कर मरे तीन वर्षीय मासूम की मौत के बाद हंगामा और मौत के कारणों ने कई सवाल छोड़े है. हर बात को लेकर हंगामा अब आम बात बन गयी है. ओबरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक समय तो ऐसा लगा, जैसे डॉक्टर और कर्मचारी दहशत […]
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औरंगाबाद /ओबर : ओबरा के गिरा में नहर में डूब कर मरे तीन वर्षीय मासूम की मौत के बाद हंगामा और मौत के कारणों ने कई सवाल छोड़े है. हर बात को लेकर हंगामा अब आम बात बन गयी है. ओबरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक समय तो ऐसा लगा, जैसे डॉक्टर और कर्मचारी दहशत में आ गये. इलाज कराने पहुंचे मरीज भी कुछ देर के लिए थथम गये.
मासूम की मौत के बाद परिजन व गांव वाले इतने आक्रोशित थे कि वे सुनने को तैयार नहीं थे. पदाधिकारियों ने भले ही किसी तरह शांत करा दिया, लेकिन आक्रोश सवाल छोड़ गया कि कब तक अस्पताल की व्यवस्था इसी तरह चलती रहेगी. वैसे औरंगाबाद के तमाम सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय व्यवस्था के नाम पर सिर्फ और सिर्फ कुव्यवस्था परोसा जा रहा है.
न समय पर डॉक्टर आते हैं और न मरीजों को बेहतर ढंग से इलाज हो रहा है. गिरा के अंकित के परिजनों का आरोप था कि जब वे उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर ही नहीं थे. ऐसे में यह कोई नयी बात नहीं है. हालांकि, स्वास्थ्यकर्मियों की माने तो मासूम की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले हो गयी थी.
अस्पताल प्रबंधक विकास शंकर ने बताया कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज देने की हर कोशिश की जा रही है. इधर, अस्पताल प्रभारी एलएस दुबे ने बताया कि डॉक्टर की भूमिका की जांच करायी जायेगी, ड्यूटी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी.
मुआवजे को लेकर दिखा आक्रोश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मासूम की मौत के बाद मुआवजे को लेकर परिजनों व गांव वालों ने खूब हंगामा किया. प्रशासनिक पदाधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की. एक समय तो ऐसा लगा कि जैसे आक्रोशितों को शांत कराने पहुंचे पदाधिकारी से आक्रोशित भीड़ जायेंगे. इस क्रम में तू-तू मैं-मैं का दौर भी चला. इस बीच कुछ बुद्धिजीवियों ने पहल की और मामला शांत हुआ. भाजपा महामंत्री विभूति नारायण सिंह ने भी अपनी भूमिका निभायी.
मनोरा रजवाहा माईनर के किनारे बसे कई गांव हर वक्त खतरे मेंगिरा गांव में मासूम अंकित की मौत के बाद उन गांव के नौनिहालों के लिए खतरे की घंटी है,जो नहर के किनारे रहते है. पता चला कि गिरा के अलावे अयोध्या बिगहा,महुआंव और मनोरा गांव बिल्कुल नहर के तट पर बसा है. इन गांव के मासूम बच्चे नहर के किनारे ही खेलते हुए दिखते है. ऐसे में खतरा उनके ऊपर भी है. गांव के लोगों को अपने बच्चों पर गंभीरता से ध्यान देना होगा अन्यथा गिरा की कहानी दुहराने में वक्त नहीं लगेगा.
मां की आंखों के सामने ही हुई घटना
गिरा गांव में मासूम अंकित की मौत के बाद पिता ध्रुव कुमार और मां रेशमा देवी चीत्कार उठी. जैसे ही अस्पताल में डॉक्टर ने मासूम को मृत घोषित किया, वैसे ही मां बेहोश हो गयी. जब होश में आयी तो बिलखते हुए कहा कि उसका बेटा इसके सामने खेल रहा था और कब नहर में गिरा उसे पता भी नहीं चला.
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