औरंगाबाद : श्रमदान से ग्रामीणों ने बनायी 10 फुट चौड़ी सड़क
Updated at : 28 Aug 2018 6:39 AM (IST)
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पिछले कई वर्षों से सड़क बनाने की मांग कर रहे थे ग्रामीण मदनपुर (औरंगाबाद) : काम के प्रति लगन और धुन पक्की हो तो बड़ी-से-बड़ी कठिनाइयां बौनी साबित होती हैं. इसी को साबित किया है मदनपुर प्रखंड की खिरिआवां पंचायत के मदारपुर गांव के ग्रामीणों ने. पिछले कई वर्षों से शासन-प्रशासन से सड़क की मांग […]
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पिछले कई वर्षों से सड़क बनाने की मांग कर रहे थे ग्रामीण
मदनपुर (औरंगाबाद) : काम के प्रति लगन और धुन पक्की हो तो बड़ी-से-बड़ी कठिनाइयां बौनी साबित होती हैं. इसी को साबित किया है मदनपुर प्रखंड की खिरिआवां पंचायत के मदारपुर गांव के ग्रामीणों ने. पिछले कई वर्षों से शासन-प्रशासन से सड़क की मांग करते हुए मदारपुर गांव के ग्रामीण जब थक गये तो उन्होंने खुद ही इसका बीड़ा उठाया और एक होकर एक किलोमीटर के अधिकतर पैदल हिस्से को बेलचे-फावड़ों के साथ बना डाला.
लक्ष्य के प्रति जुनून किसे कहते हैं इसका उदाहरण है मदारपुर गांव के वे ग्रामीण जिन्होंने बेहद खराब रास्ते के बावजूद दस फुट चौड़ी कच्ची सड़क का निर्माण कर लिया है. मुश्किल क्षेत्र होने के बावजूद बेहद विपरीत परिस्थितियों पर ग्रामीणों के मजबूत हौसले भारी पड़े और अब भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है.
शासन से सड़क की मांग पूरी ना होने पर ग्रामीणों ने परिश्रम और चंदा जमा करने के साथ गांव के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से भी आर्थिक मदद मांगी और खुद ही जमीन पर उतर कर लगभग एक किलोमीटर से ज्यादा की चौड़ी सड़क का निर्माण कर डाला. ग्रामीण रितेश राम, शिवपूजन दास, अर्जुन राम, रामप्रवेश राम, मोहन राम, जयनंदन राम, रंजीत यादव, पूर्व पंचायत समिति सदस्य देवनंदन साव, विदेशी भुईया, नंदलाल भुईया, प्रमोद भुईया का कहना है कि जब सरकार से कहने के बावजूद कुछ नहीं हुआ तो मजबूरन उन्हें सड़क निर्माण का जिम्मा उठाना पड़ा. उनका कहना है कि उन्होंने जो आपसी सहभागिता से पैसा जमा किया था वह सड़क निर्माण पर खत्म हो गया. लिहाजा अभी सड़क निर्माण रोकना पड़ रहा है .
ग्रामीणों का कहना है कि जब कोई गांव में बीमार पड़ता है तो उन्हें कंधे पर सड़क तक लाना पड़ता है. उनका कहना है कि रोज एक किलोमीटर पैदल स्कूल जाने वाले बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. कई बार तो गांव में जाने के दौरान बाइक सवार गिरकर घायल हो गये हैं.
इसलिए नेताओं और सरकार के चक्कर में पड़ने की बजाय उन्होंने खुद जमीन पर उतरने का फैसला लिया. खास बात यह है कि मदारपुर गांव में एक सौ अधिक घर महादलित परिवार रहते है. ग्रामीणों को मेहनत और पसीने से तैयार सड़क भले अभी वाहनों के जाने लायक पूरी तरह नहीं बन सकी हो, लेकिन इंजीनियरिंग का ज्ञान ना होने के बावजूद ग्रामीणों ने जिस तरीके से सड़क का निर्माण किया है वह किसी इंजीनियरिंग से कम नहीं.
ऐसे में आधुनिक भागीरथ साबित हुए ग्रामीण के जज्बे की हर कोई सराहना कर रहा है. ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों के प्रति काफी आक्रोश था. ग्रामीणों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को इस क्षेत्र से मात्र वोट लेने से मतलब है. इस बार उन्हें सबक भी सिखा देंगे. ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रतिनिधि चाहते तो गांव की सड़क काफी पहले ही बन जाती.
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