..कब मिलेगा जाम से छुटकारा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Apr 2014 5:13 AM
औरंगाबाद (ग्रामीण) : पुरानी जीटी रोड पर हर दिन लगने वाली जाम कोढ़ का रूप धारण कर चुकी है. इस मर्ज की दवा भी नहीं दिख रही है. सैकड़ों लोग इससे हलकान हैं. लेकिन प्रशासनिक पदाधिकारियों को इससे कोई लेना-देना नहीं है. पुरानी जीटी रोड मुख्य बाजार पथ से होकर निकलना मुश्किलों भरा है. हर […]
औरंगाबाद (ग्रामीण) : पुरानी जीटी रोड पर हर दिन लगने वाली जाम कोढ़ का रूप धारण कर चुकी है. इस मर्ज की दवा भी नहीं दिख रही है. सैकड़ों लोग इससे हलकान हैं. लेकिन प्रशासनिक पदाधिकारियों को इससे कोई लेना-देना नहीं है.
पुरानी जीटी रोड मुख्य बाजार पथ से होकर निकलना मुश्किलों भरा है. हर दिन इस पथ पर घंटों जाम का नजारा होता है. जाम से स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी होती है. स्कूल बस काफी देर तक जाम में फंसे होते हैं. पुरानी सब्जी मंडी, नावाडीह मोड़, बड़ी मसजिद व धरनीधर मोड़ के समीप हमेशा जाम लगा होता है.
इससे निजात दिलाने में प्रशासनिक पदाधिकारियों ने कोई भी कारगर कदम अब तक नहीं उठाया. जबकि, जाम से निजात दिलाने के लिए कई नियम कानून भी बनाये गये थे. अनुमंडल पदाधिकारी के साथ-साथ नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने बैठ कर नियमों का खाका तैयार की थी. पुरानी जीटी रोड पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए कई जगहों पर वाहन स्टैंड बनाया गया था.
बीच बाजार में वाहन लगाने पर जुर्माना का आदेश निर्गत किया गया था. ऑटो चालकों व फुटपाथ पर दुकान लगानेवालों के लिए जगह भी निर्धारित की गयी थी. लेकिन बनाये गये नियम ताक पर रख दिये गये. नियम बनाने में जो पदाधिकारी ने अहम भूमिका निभायी थी, उनका ट्रांसफर हो गया. हम बात कर रहे है केडी प्रौज्जवल की. तत्कालीन एसडीओ के जाने की बाद एसडीओ के रूप में राजीव रौशन आये, उनकी भी ट्रांसफर हो गया.
फिलहाल एसडीओ के पद पर भीम प्रसाद पदस्थापित हैं. इनके द्वारा अभी तक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए कोई भी कोशिश नहीं की गयी है. शासनिक प्रशासनिक के पदाधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. सवाल यह उठता है कि आखिर शहर की सड़कों को जाम से मुक्ति कब मिलेगी.
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