Arwal News: अरवल में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निजी अस्पताल, सुविधाएं शून्य लेकिन वसूली बड़े अस्पतालों जैसी

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Arwal News: अरवल में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निजी अस्पताल, सुविधाएं शून्य लेकिन वसूली बड़े अस्पतालों जैसी

Arwal News: अरवल में बिना मानकों और मूलभूत सुविधाओं के संचालित हो रहे निजी अस्पताल मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता और निगरानी के अभाव में अवैध नर्सिंग होम का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है.जानिए पूरी खबर नीचे

Arwal News: अरवल में बिना मानकों और मूलभूत सुविधाओं के संचालित हो रहे निजी अस्पताल मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता और निगरानी के अभाव में अवैध नर्सिंग होम का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है.जानिए पूरी खबर नीचे

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Arwal News: (निशिकांत) अरवल जिले में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है.जिले में चंद बेड के सहारे संचालित हो रहे कई निजी अस्पतालों में मरीजों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, बावजूद इसके उनसे बड़े अस्पतालों की तरह भारी शुल्क वसूला जा रहा है.

60 से अधिक अस्पताल अवैध

जानकारी के अनुसार जिले में 60 से अधिक निजी नर्सिंग होम और अस्पताल ऐसे हैं, जो अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं. इनमें से कई संस्थानों का औपबंधिक निबंधन वर्षों पहले ही समाप्त हो चुका है। वर्ष 2025 में केवल 8 अस्पतालों ने औपबंधिक निबंधन कराया था, लेकिन उनका निबंधन भी अब समाप्त हो चुका है.

क्या कहता है कानून?

बिहार नैदानिक स्थापन पंजीयन एवं विनियमन नियमावली के तहत किसी भी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम को पंजीकरण कराना अनिवार्य है. स्थायी निबंधन के लिए अस्पतालों को आधारभूत संरचना, प्रशिक्षित मानव संसाधन तथा मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाओं का विवरण देना होता है। इसके बावजूद शहर से लेकर कस्बाई इलाकों तक बिना निबंधन के अस्पताल और क्लिनिक धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं.

बुनियादी सुविधाओं का टोटा और वित्तीय शोषण

जिले के अधिकांश निजी नर्सिंग होम में नर्सिंग होम स्थापना अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कई अस्पतालों में न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही शुद्ध पेयजल उपलब्ध है. मरीजों के लिए अन्य मूलभूत सुविधाएं भी नदारद हैं. यहां तक कि डॉक्टरों की काउंसलिंग फीस तक का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया जाता, जिससे मरीज अनजाने में ठगी का शिकार हो रहे हैं.

सरकार द्वारा निजी नर्सिंग होम, हॉस्पिटल, क्लिनिक और पैथोलॉजी लैब को कानून के दायरे में लाने के लिए नर्सिंग होम एक्ट बनाया गया है, लेकिन स्थिति यह है कि इस कानून का पालन कराने वाला स्वास्थ्य विभाग ही इसके प्रति उदासीन नजर आ रहा है.

स्थानीय लोगों का मानना है कि सुविधाओं की भारी कमी और मनमानी वसूली के कारण ही निजी क्लिनिकों एवं नर्सिंग होम में आए दिन हंगामा और विवाद की स्थिति उत्पन्न होती रहती है.

क्या कहते है पदाधिकारी


सिविल डॉ राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि सभी नर्सिंग होम का पहले सर्वे कराया जायेगा सर्वे के बाद सभी को नोटिस जारी किया जायेगा. उसके बाद कार्यवाई कि जाएगी.

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विवेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By विवेक पाण्डेय

विवेक रंजन पाण्डेय पिछले 8 वर्षों से टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने Aryabhatta Knowledge University, Patna से BJMC की पढ़ाई की है.

उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Network 10 टीवी चैनल से की. इसके बाद News India, News18 Digital सहित कई राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग और कंटेंट राइटिंग का अनुभव प्राप्त किया.

वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में Content Writer के रूप में कार्यरत हैं. यहां बिहार की राजनीति, चुनाव, शिक्षा, कृषि, रोजगार, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सरोकारों और विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों पर तथ्यपरक और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं.

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