शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: अरवल में बिना बिजली और सुरक्षा के बच्चों की रो रही पढ़ाई, स्कूल की बदहाली से नाराज लोग
Published by : raginisharma Updated At : 16 May 2026 12:13 PM
बदहाल स्कूल की तस्वीर
Bihar News: अरवल में बदहाल व्यवस्था के बीच चल रही बच्चों की पढ़ाई. स्कूल भवन तो बना, लेकिन आज तक भवन में प्लास्टर, दरवाजे और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं. विद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता बरसात के दिनों में और अधिक मुश्किल हो जाता है. विद्यालय भवन की चारदीवारी नहीं होने के कारण परिसर में आवारा पशुओं और जंगली जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है. ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.
Bihar News:(वंशी) अरवल जिले के करपी प्रखंड अंतर्गत कोचहसा पंचायत के कंसारा गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बद से बदतर बनी हुई है. विद्यालय स्थापना काल से ही जर्जर भवन में संचालित हो रहा है. स्कूल भवन तो बना, लेकिन आज तक भवन में प्लास्टर, दरवाजे और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं. विद्यालय तक पहुंचने के लिए कोई व्यवस्थित सड़क भी नहीं है. घने झाड़ियों और संकीर्ण रास्तों के बीच से छात्र और शिक्षक विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं.
बरसात में घुटने भर पानी से गुजरकर पहुंचते हैं छात्र-शिक्षक
विद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता बरसात के दिनों में और अधिक मुश्किल हो जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के समय रास्ते में घुटने तक पानी जमा हो जाता है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक साकेत कमल ने बताया कि स्कूल तक पहुंचने का रास्ता काफी कन्जेस्टड और अव्यवस्थित है. कई बार जंगली रास्तों से गुजरकर विद्यालय जाना पड़ता है.
बिना बाउंड्री के परिसर में घूमते हैं आवारा पशु
विद्यालय भवन की चारदीवारी नहीं होने के कारण परिसर में आवारा पशुओं और जंगली जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है. इसके अलावा कुत्तों की आवाजाही भी बनी रहती है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है. स्कूल के संचालक ने बताया कि जर्जर क्लासरूम की दीवारों पर अक्सर जहरीले सांपों के केंचुल भी दिखाई देते हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों में भय बना रहता है.
बिजली नहीं, करकट के भवन में शौचालय और रसोईघर
विद्यालय में एक करकट भवन के सहारे शौचालय और रसोईघर का निर्माण कराया गया है, लेकिन बिजली की सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं हो सकी है. विद्यालय में पहली से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है, जहां प्रधानाध्यापक सहित कुल पांच शिक्षक कार्यरत हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद नहीं बदली तस्वीर
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1985 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे गांव पहुंचे थे और सड़क निर्माण का आश्वासन दिया था. उस समय मुख्यमंत्री हाथी पर सवार होकर गांव पहुंचे थे, लेकिन दशकों बाद भी गांव की स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आया.
ग्रामीण बोले- विकास से अब भी दूर है गांव
ग्रामीण प्रशांत शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, संजय शर्मा और राजू शर्मा समेत अन्य लोगों ने बताया कि गांव आज भी विकास की मूलभूत सुविधाओं का इंतजार कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न स्वास्थ्य केंद्र है और न ही उच्च माध्यमिक विद्यालय की सुविधा. बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है, जबकि इलाज के लिए लोगों को 10 से 12 किलोमीटर दूर अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है. इसके अलावा खेती पर निर्भर ग्रामीणों को सिंचाई सुविधा के अभाव में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.
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