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पीरो में हर दिन नो इंट्री का हो रहा उल्लंघन, शाम छह बजे से ही बालू लदे वाहनों की शुरू हो जाती है शहर में इंट्री

Updated at : 07 Dec 2024 9:14 PM (IST)
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पीरो में हर दिन नो इंट्री का हो रहा उल्लंघन, शाम छह बजे से ही बालू लदे वाहनों की शुरू हो जाती है शहर में इंट्री

शहर में बालू लदे बड़े वाहनों से आये दिन हो रहे सड़क दुर्घटनाओं पर लगाना लगाने के लिए प्रशासन की ओर से पीरो शहर में सुबह छह बजे से रात्रि आठ बजे तक नो इंट्री लागू की गयी है.

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पीरो.

शहर में बालू लदे बड़े वाहनों से आये दिन हो रहे सड़क दुर्घटनाओं पर लगाना लगाने के लिए प्रशासन की ओर से पीरो शहर में सुबह छह बजे से रात्रि आठ बजे तक नो इंट्री लागू की गयी है. लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण यहां नो-इंट्री का निर्देश अब बेअसर साबित हो रहा है. यहां सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक नो इंट्री है. इसके बावजूद यहां अक्सर दोपहर में भी बड़े वाहन शहर से गुजरते देखे जा सकते हैं. वही शाम 8 बजे के बजाय 6 बजे से ही नो इंट्री की अघोषित रूप से समाप्त हो जाती है और 6 बजे के बाद से ही शहर में बड़े और बालू लदे वाहनों का लगातार गुजरना शुरू हो जाता है. शाम 6 बजे और 7 बजे बाजार में लोगों की भीड़ रहती है और ऐसे में आम लोगों को सड़क से गुजरने और सड़क पार करने में काफी परेशानी होने लगती है. बाजार में भीड़भाड़ के कारण यहां सड़क पर दुर्घटना होने की संभावना भी बढ़ जाती है. शादी विवाह का समय होने के कारण अक्सर पीरो शहर में शाम 6 बजे के बाद बड़े वाहनों की लंबी कतार लगने की वजह से जाम की स्थिति भी बन जाती है. सबसे ज्यादा खतरा पैदल चलने वालों और बाइक सवारों को होता है. पहले रात्रि 9 बजे तक थी नो इंट्री, डीएम के निर्देश पर हुई 8 बजे तक, उसका भी नही होता पालन : पीरो शहर में लगातार हुई सड़क दुर्घटना में कई लोगों की मौत होने के बाद स्थानीय लोगों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया था, तब प्रशासन पीरो शहर में नो एंट्री लागू करने पर राजी हुआ था. शुरुआत में पीरो शहर में सुबह 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक पीरो शहर में बड़े वाहनों के लिए नो इंट्री का नियम लागू किया गया था. नियम के लागू होने के कुछ माह बाद ही कथित तौर पर राजस्व के कमी होने और ट्रक ओनरों के अनुरोध के आलोक में भोजपुर के तत्कालीन डीएम के निर्देश पर पीरो के नो इंट्री के समय को घटाकर रात्रि 9 बजे से रात्रि 8 बजे तक कर दिया गया. लेकिन इसके बावजूद ट्रक चालकों द्वारा नो इंट्री के निर्देश को धड़ले से ठेंगा दिखाया जा रहा है. पीरो में नो इंट्री के निर्देश के बेअसर होने में प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता का भी महत्वपूर्ण योगदान है. शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और के लिए यहां बाईपास निर्माण की मांग काफी पहले से उठाई जाती रही है. बिहिया-बिहटा स्टेट हाइवे के निर्माण के बाद इस सड़क पर चलने वाले बालू लदे बड़े वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ गयी. शहर के बीचों बीच से होकर दिनभर गुजरते बड़े वाहनों और इनसे होने वाली सड़क दुर्घटनाओं से त्रस्त लोगों ने उस समय भी बाइपास के निर्माण की मांग पुरजोर तरीके से उठाई थी. करीब एक वर्ष पूर्व भोजपुर के तत्कालीन डीएम राजकुमार ने पीरो में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पीरो में बाईपास के निर्माण का कार्य जल्द शुरू कराने का आश्वासन भी दिया था. लेकिन करीब एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक पीरो में बाइपास निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है.

पीरो में बाइपास निर्माण की मांग को लेकर होगा आंदोलन :

पीरो के बाईपास निर्माण की मांग एकबार फिर जोर पकड़ने लगी है. जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष मदन स्नेही और गौहर खान ने बिहार सरकार को जिला प्रशासन से पीरो में जल्द से जल्द बाइपास का निर्माण कराये जाने की मांग करते हुए कहा कि पीरो शहर व आसपास के इलाके में अब तक बालू लदे वाहनों से कुचलकर दो दर्जन से अधिक लोगों की जाने जा चुकी है. इसके बावजूद इस समस्या के स्थाई समाधान की दिशा में सरकार और प्रशासन कारगर प्रयास नहीं कर रही है. दोनों नेताओं ने कहा कि पीरो में बाईपास निर्माण जल्द शुरू कराए जाने को लेकर जन संघर्ष मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री और भोजपुर डीएम से मिलेगा. इसके बाद अगर बाईपास निर्माण की दिशा में प्रशासनिक पहल नहीं की जाती तो जन संघर्ष मोर्चा चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा.

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