उदघाटन की बाट जोह रहा वर्षों पूर्व बना अस्पताल
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 05 Dec 2024 6:38 PM
लोगों ने की अस्पताल चालू कराने की मांग
लाखों की लागत से पचीरा पंचायत के वार्ड संख्या छह में बना है अस्पताल फोटो-2-वर्षों पूर्व बन कर तैयार अस्पताल. फोटो-3-डॉ रोहित कुमार झा, प्रभारी, रेफरल अस्पताल, रानीगंज. फोटो-4-अविनाश मंगलम, राजद नेता. प्रतिनिधि, परवाहा सरकार व स्वास्थ्य विभाग हर दिन स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का दावा करती है. लेकिन इस दावे की वास्तविकता कुछ और है. इसकी एक मिसाल यह है कि रानीगंज प्रखंड मुख्यालय से लगभग 08 किलोमीटर की दूरी पर पचीरा पंचायत के वार्ड संख्या छह में वर्षों पूर्व बना अस्पताल अब तक चालू नहीं हो सका है. पचीरा में स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य शुरू होने से स्थानीय लोग बेहद खुश थे. उन्हें यह उम्मीद थी कि अब बीमार पड़ने पर उन्हें इलाज के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी. लेकिन बीतते समय के साथ उनकी उम्मीदों पर पानी फिरने लगा है. अस्पताल का निर्माण पूर्ण हुए पांच साल का वक्त गुजर चुका है. लेकिन इसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है. इस कारण पचीरा, राघोपुर, विशनपुर, मधुलता सहित अन्य इलाके के ग्रामीणों में निराशा घर करने लगा है. अस्पताल का भवन अब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है. भवन में लगे खिड़की, दरवाजा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है. स्थानीय लोग कहते हैं कि जब अस्पताल के माध्यम से लोगों का इलाज ही नहीं हो रहा हे. तो फिर इसके निर्माण में लाखों की राशि खर्च ही क्यों की गयी. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से अविलंब इस अस्पताल का संचालन कराने की मांग की है. वहीं रानीगंज रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ रोहित कुमार झा ने बताया कि पचीरा में निर्मित अस्पताल को दुरुस्त करवाने को लेकर विभाग को लिखा गया है. हाल ही में उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण किया है. अस्पताल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा बहाल करने को लेकर विभागीय स्तर से जरूरी पहल किये जाने की जानकारी उन्होंने दी. इधर राजद के राजद नेता अविनाश मंगलम ने कहा कि अगर प्रशासन व विभाग जल्द अस्पताल का संचालन शुरू कराने को लेकर कोई कारगर पहल नहीं करती है. तो बाध्य होकर अपने समर्थकों के साथ सामूहिक रूप से अनशन करेंगे. सरकारी अस्पताल में ज्यादातर गरीब लोगों का इलाज होता है. अस्पताल संचालित नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को विभिन्न बीमारियों के इलाज में परेशानी झेलनी पड़ रही है.
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