कक्षा तीन से ही बच्चे पढ़ेंगे बापू की कहानी

Updated at : 21 Aug 2018 4:05 AM (IST)
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कक्षा तीन से ही बच्चे पढ़ेंगे बापू की कहानी

हाई स्कूल में वर्ग नौवीं से 12वीं तक पढ़ायी जा रही है बापू की कहानी बापू की जीवनी से रू-ब-रू होंगे सरकारी विद्यालय के सभी बच्चे अररिया : स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की मुहिम शुरू की गयी है. इसके लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को आदर्श मानते हुए […]

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हाई स्कूल में वर्ग नौवीं से 12वीं तक पढ़ायी जा रही है बापू की कहानी

बापू की जीवनी से रू-ब-रू होंगे सरकारी विद्यालय के सभी बच्चे
अररिया : स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की मुहिम शुरू की गयी है. इसके लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को आदर्श मानते हुए बच्चों को उनके जीवन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बातों का पाठ पढ़ाया जायेगा ताकि इन बातों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए बच्चे इसका अनुसरण कर सकें. यह मुहिम हाई स्कूलों के बाद मध्य विद्यालयों में भी शुरू होने जा रही है. इसके तहत वर्ग तीन से आठ तक के बच्चे मोहन से बापू बनने तक के सफर से जुड़े तमाम रोचक और प्रमुख आयामों को पढ़ेंगे. बापू के जीवन से जुड़े प्रसंगों को समाहित किये हुए इस किताब का नाम बापू की पाती रखी गयी है. इसकी 10-10 प्रति सभी स्कूलों को भेजी जा रही है. इस एक कहानी या अध्याय का पाठ प्रतिदिन सभी स्कूलों में प्रार्थना के बाद कराया जायेगा.
एक कहानी का पाठ लगातार दो दिन तक कराया जायेगा. ताकि बच्चों के जेहन में यह अच्छे से बैठ जाय और इससे सही तरीके से सबक लेते हुए अपने जीवन में उतारते की सार्थक कोशिश करें. शिक्षा विभाग के जन शिक्षा निदेशालय की तरफ से तैयार यह किताब हाई स्कूल के लिए तैयार की गयी किताब से बिल्कुल अलग है. इसे छोटे बच्चों के मानस पटल के हिसाब से बापू की जीवन की घटनाओं को बेहद सरल तरीके से प्रस्तुत की गयी है.
इससे पहले हाइस्कूलों में शुरू हो चुकी है यह परंपरा
वर्तमान में यह परंपरा सभी हाई स्कूलों में वर्ग नौ से 12 वीं तक में चलायी जा रही है. एक था मोहन नामक इस किताब की सामग्री काफी अलग तरीके से तैयार की गयी है. इसमें बड़े बच्चों की मानसिक स्थिति का हर तरह से ध्यान रखा गया है. अब मध्य विद्यालयों में शुरू होने जा रहा है. इससे सभी सरकारी स्कलों में वर्ग तीन से 12 वीं तक के बच्चों के बीच बापू की विचारधारा को प्रेरित करने की मुहिम शुरू हो जायेगी. ताकि बच्चे इससे नैतिक सबक सीख सके.
सभी प्रधानाध्यापकों का एक दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी. किताब की महत्ता बताते हुए पाठन का तरीका से लेकर अन्य बातों को बताया जायेगा. ताकि सभी स्कूलों में इसका सही तरीके से पाठन हो सके. इस एक दिवसीय ट्रेनिंग के बाद सभी मध्य विद्यालयों में सितंबर के पहले सप्ताह से इस परंपरा की शुरूआत की जायेगी. एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाना होगा. जिसमें पाठ करते हुए बच्चों का फोटो अपलोड करनी है.
बालेश्वर प्रसाद यादव, डीपीओ प्राथमिक शिक्षा सह एसएसए
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