भ्रम की राजनीति करती है भाजपा, मुकेश सहनी बोले- OBC आयोग से कितने पिछड़ों का हुआ कल्याण बतायें अमित शाह

मुकेश सहनी ने रविवार को कहा कि भले ही भाजपा ने पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष भगवान लाल सहनी को बना दिया गया, लेकिन तीन साल के कार्यकाल में आयोग ने पिछड़ों के कल्याण के लिए कितना काम किया, वहां क्या हुआ, यह जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री को देना चाहिए.
पटना. बिहार के पूर्व मंत्री और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने भाजपा नेता और गृहमंत्री अमित शाह पर हमला बोला है. मुकेश सहनी ने कहा है कि भाजपा लोगों के बीच भ्रम फैला कर सत्ता में आती है. सहनी ने रविवार को कहा कि भले ही भाजपा ने पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष भगवान लाल सहनी को बना दिया गया, लेकिन तीन साल के कार्यकाल में आयोग ने पिछड़ों के कल्याण के लिए कितना काम किया, वहां क्या हुआ, यह जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री को देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि केवल एक सहनी को अध्यक्ष बना देने से मल्लाह जाति या पिछड़े समाज का विकास नहीं हो जाता है. केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने भगवान लाल सहनी को ओबीसी आयोग का अध्यक्ष बनाकर भ्रम की राजनीति की है.
वीआईपी नेता मुकेश सहनी ने दावे के साथ कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान पिछड़ों, अत्यंत पिछड़ों के लिए एक भी कल्याण के काम नहीं हुए हैं. अध्यक्ष भगवान लाल सहनी का कार्यकाल भी अब पूरा हो गया. अब तक उन्होंने क्या किया, किसी को पता नहीं है.
उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता प्रारंभ से ही लोगों को भ्रम में डालने की राजनीति कर सत्ता में बने रहना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि निषादों के आरक्षण को लेकर पिछले कई वर्षों से वीआईपी पार्टी आंदोलनरत रही है, लेकिन निषाद को बरगला कर वोट लेनेवाली भाजपा की सरकार ने अब तक आरक्षण की व्यवस्था नहीं की है, जिससे पूरे समाज में नाराजगी है.
बोचहां चुनाव के बाद भाजपा में मुकेश सहनी को लेकर मंथन चल रहा है. चुनाव में सामाजिक समीकरण के लिए अगर सहनी जरूरी थे, तो भाजपा के पास भी इस समाज के राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भगवान लाल सहनी, दो बार के सांसद अजय निषाद एवं एमएलसी अर्जुन सहनी सरीखे कई बड़े नेता मौजूद हैं, लेकिन भाजपा को मुकेश सहनी से अलग होने के बाद ये सभी मल्लाह नेता सहनी का वोट भाजपा को नहीं दिला पाये.
ऐसे में मुकेश सहनी का यह आरोप है कि किसी को महज आयोग का अध्यक्ष या विधायक बना देने से समाज का विकास नहीं होता है. समाज के लिए जब काम होता है तभी समाज और लोग उसके साथ जुड़ते हैं. भाजपा में रहकर ये मल्लाह नेताओं ने पिछड़ों, अत्यंत पिछड़ों के लिए एक भी कल्याण के काम नहीं किये हैं, जबकि वीआईपी ने पिछड़ों, अत्यंत पिछड़ों के कल्याण के लिए सत्ता से अलग होने का फैसला किया है.
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