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लोजपा के बाद अब नजर कांग्रेस पर, पार्टी में हुई टूट तो बदल जायेगा बिहार का राजनीतिक समीकरण, जानिये क्या है सदन का गणित

Updated at : 16 Jun 2021 10:51 AM (IST)
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लोजपा के बाद अब नजर कांग्रेस पर, पार्टी में हुई टूट तो बदल जायेगा बिहार का राजनीतिक समीकरण, जानिये क्या है सदन का गणित

लोजपा में हुई टूट के बाद राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि इस तरह की घटना कांग्रेस विधानमंडल के सदस्यों में भी होने की संभावना है. कांग्रेस पार्टी में अगर टूट होती है तो विधानसभा व विधान परिषद में राजनीतिक समीकरण बदल जायेगा.

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पटना. लोजपा में हुई टूट के बाद राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि इस तरह की घटना कांग्रेस विधानमंडल के सदस्यों में भी होने की संभावना है. कांग्रेस पार्टी में अगर टूट होती है तो विधानसभा व विधान परिषद में राजनीतिक समीकरण बदल जायेगा. जदयू की सदस्य संख्या जहां अधिक हो जायेगी. वहीं, सरकार बनाने को बेताब महागठबंधन कमजोर पड़ जायेगा.

महागठबंधन की ताकत में कांग्रेस के भी 19 विधायकों को शामिल किया जाता है. ऐसे में किसी भी संभावित टूट से महागठबंधन का आंकड़ा कमजोर साबित होगा. दूसरी ओर टूट की अटकलों के बीच पार्टी ने किसी भी संभावित टूट को सिरे से खारिज कर दिया है.

पार्टी का दावा है कि विधायक दल में टूट के लिए कम से कम 13 सदस्यों की मौजूदगी चाहिये. जबकि, 19 सदस्यीय कांग्रेस विधायक दल में अल्पसंख्यक वर्ग के चार और पांच से छह सदस्य ऐसे हैं जिनके बाप-दादा भी कांग्रेसी रहे हैं. ऐसे खांटी कांग्रेसी विधायक किसी भी स्थिति में टूटने से बचेंगे.

बावजूद इसके राजनीतिक हलकों में कांग्रेस विधायक दल में टूट की चर्चा जोरों पर है. पिछले विधानसभा चुनाव के बाद जदयू के महागठबंधन से अलग होने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे अशोक चौधरी सहित अन्य विधान परिषद सदस्यों ने जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली थी.

अशोक चौधरी के पहले 2014 के लोकसभा चुनाव के समय तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी महबूब अली कैसर ने कांग्रेस को अलविदा कर लोजपा का दामन थाम लिया था. हालांकि पिछले दो दशकों में किसी भी विधानसभा सदस्य द्वारा दल बदल कर न तो राजद में और नहीं जदयू में जाने की घटना हुई है.

जिन लोगों को कांग्रेस छोड़कर जाने की चर्चा चल रही है, उनमें अधिकतर दूसरे दलों से कांग्रेस में आकर शामिल हुए हैं और पहली या दूसरी बार कांग्रेस कोटे से विधायक बने हैं. पार्टी को तोड़नेवाले विधायकों के पास संख्याबल का शुरू से अभाव रहा है.

ऐसे में पार्टी टूटती है तो दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता चली जायेगी. इधर, पार्टी अध्यक्ष डा मदन मोहन झा ने पार्टी में किसी प्रकार की टूट को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक अफवाह बताया.

Posted by Ashish Jha

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