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आचार्य विद्यासागर जी महाराज को जैन समाज के लोगों ने ऐसे दी श्रद्धांजलि

Updated at : 26 Feb 2024 7:17 AM (IST)
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आचार्य विद्यासागर जी महाराज को जैन समाज के लोगों ने ऐसे दी श्रद्धांजलि

संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के समतापूर्वक समाधि मरण के उपरांत मधुबन स्थित गुणायतन संस्था में भावपूर्ण विनयांजलि सभा का आयोजन रविवार को किया गया

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संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के समतापूर्वक समाधि मरण के उपरांत झारखंड राज्य में गिरिडीह जिला के मधुबन स्थित गुणायतन संस्था में भावपूर्ण विनयांजलि सभा का आयोजन रविवार को किया गया. सभा में श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके संदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया. बताते चलें कि संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज काे बीते 18 फरवरी को डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ में समाधि मरण प्राप्त हुआ था.

  • संत शिरोमणि के समतापूर्वक समाधि मरण पर मधुबन की गुणायतन संस्था में भावपूर्ण विनयांजलि सभा
  • आचार्यश्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर जैन समाज के लोगों ने उनके संदेशों को जीवन में उतारने का लिया संकल्प
  • 18 फरवरी को डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ में समाधि मरण को प्राप्त हुए थे महाराज

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सम्मेद शिखर से आचार्य विद्यासागर जी का रहा पुराना संबंध

गुरुदेव का सम्मेद शिखर जी से भी पुराना संबंध रहा था. महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि प्रमाण सागर जी महाराज के सान्निध्य में मधुबन में भव्य गुणायतन संस्था व मंदिर का निर्माण किया जा रहा है. विनयांजलि सभा की शुरुआत आचार्यश्री के चित्र पर दीप प्रज्वलन तथा पुष्प अर्पित करने के साथ हुई. इस दौरान वक्ताओं व साधु-संतों द्वारा आचार्यश्री के जीवन चरित्र का वर्णन किया गया तथा उनके गुणों व संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया.

वर्ष 1983 में सम्मेद शिखर जी आये थे आचार्यश्री

महान तीर्थंकरों की श्रेष्ठतम परंपराओं को अपने जीवन में साक्षात करने वाले जैन धर्म के महान आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने 1968 में दिगंबरी दीक्षा ली थी और तब से निरंतर सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य की साधना करते हुए इन पंच महाव्रतों के देशव्यापी प्रचार के लिए समर्पित हो गये.

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महाराज ने अपने जीवन में सैकड़ों मुनियों एवं आर्यिकाओं को दीक्षा दी

लोक कल्याण की भावना से अनुप्राणित होकर पूज्य आचार्य महाराज ने अपने जीवन में सैकड़ों मुनियों एवं आर्यिकाओं को दीक्षा प्रदान की और लोकोपकारी कार्यों के लिए सदैव अपनी प्रेरणा और आशीर्वाद प्रदान किया. आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज सन 1983 में सम्मेद शिखर आये थे. लगभग दो माह तक मधुबन में रुकने के बाद इसरी के लिए विहार कर गये थे. इसरी में आचार्यश्री ने एक चातुर्मास किया था.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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