खेल दिवस पर विशेष : भारतीय खेल अब गरीब नहीं, सरकार और कंपनियों के आगे आने से हो रहा बदलाव

Updated at : 29 Aug 2017 7:25 AM (IST)
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खेल दिवस पर विशेष : भारतीय खेल अब गरीब नहीं, सरकार और कंपनियों के आगे आने से हो रहा बदलाव

विधान चंद्र मिश्र रांची : भारतीय खेल जगत अब गरीब नहीं रहा. यहां करोड़ों-अरबों रुपये बरस रहे हैं. खिलाड़ी संघर्ष जरूर कर रहे हैं, लेकिन ट्रॉफी जीतने और मेडल लाने के लिए. करीब कुछ वर्ष पहले ऐसी स्थिति नहीं थी, लेकिन लीग क्रांति और खेल की ब्रांडिंग ने इसका कायाकल्प कर दिया है. करीब तीन […]

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विधान चंद्र मिश्र
रांची : भारतीय खेल जगत अब गरीब नहीं रहा. यहां करोड़ों-अरबों रुपये बरस रहे हैं. खिलाड़ी संघर्ष जरूर कर रहे हैं, लेकिन ट्रॉफी जीतने और मेडल लाने के लिए. करीब कुछ वर्ष पहले ऐसी स्थिति नहीं थी, लेकिन लीग क्रांति और खेल की ब्रांडिंग ने इसका कायाकल्प कर दिया है.
करीब तीन दशक पहले का इतिहास देखें, तो भारतीय हॉकी टीम ने अंतिम बार 1980 में ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था, तो टीम के सदस्य रहे सिलवानुस डुंगडुंग को बिहार के राज्यपाल ने दो हजार का पुरस्कार दिया था. पर, 2016 में बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु जब रियो ओलिंपिक से रजत पदक जीत कर लौटीं, तो 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इनाम में मिली.
दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि जब भी फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सैंकड़ा मारता था, तो पिता जी 10 रुपये दिया करते थे और हाल ही में महिला विश्व कप क्रिकेट के फाइनल में हारनेवाली भारतीय क्रिकेट टीम की प्रत्येक सदस्यों को बीसीसीआइ ने 50-50 लाख रुपयों का पुरस्कार दिया. एथलीट मिल्खा सिंह व पीटी ऊषा ने संघर्ष किया, पर अब मेडल लाने के लिए केंद्र सरकार अपने एथलीटों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. यह चंद उदाहरण हैं, लेकिन इन उदाहरणों से यह अनुमान जरूर लगाया जा सकता है कि खेल पूरी तरह से बदल चुका है.
लगभग सभी प्रमुख खेलों की लीग, बरस रहे पैसे
इंडियन क्रिकेट लीग की सफलता के बाद भारत में अब सभी प्रमुख खेलों की लीग शुरू हो गयी है. एथलेटिक लीग, बैडमिंटन लीग, आइपीएल, इंडियन सुपर लीग, गोल्फ प्रीमियर लीग, हॉकी इंडिया लीग, वर्ल्ड सीरीज हॉकी, प्रो-कबड्डी लीग, इंडियन रेसिंग लीग, इंटरनेशनल प्रीमियर टेनिस लीग, इंडियन वॉलीबॉल लीग, इंडियन रेसलिंग लीग, टेबल टेनिस लीग आदि से खिलाड़ियों को लाख से लेकर करोड़ों रुपये मिल रहे हैं.
सरकारी मदद के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियां भी खिलाड़ियों पर खूब पैसे लगा रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 वित्तीय वर्ष की तुलना में 2016-17 वित्तीय वर्ष में स्पोर्ट्स स्पांसरशिप में 19.33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
अन्य खेलों में 83.5 फीसदी की बढ़ोतरी
बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु, पहलवान साक्षी मल्लिक, फुटबॉलर सुनील छेत्री सहित अन्य सितारों के चमकने से इन खेलों में भी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखायी है. यहां 83.5 फीसदी बढ़ोतरी हुई. प्रायोजक के तौर पर 77.1 करोड़ मिले.
खेल प्रतिभा खोज पोर्टल से मिलेगी 1000 खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सोमवार को राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज पोर्टल लांच किया, जो देश के प्रत्येक कोने से खेल प्रतिभा खोज निकालने की सरकार की पहल है. इस पर कोई भी बच्चा या उसके माता-पिता, शिक्षक या कोच उसका बायोडाटा या वीडियो पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं.
खेल मंत्रालय प्रतिभावान खिलाड़ियों को चुनेगा और उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण के केंद्रों में ट्रेनिंग देगा.
गोयल ने बताया कि मंत्रालय ने आठ साल के लिए पांच लाख रुपये की 1000 छात्रवृत्तियां भी शुरू करने का फैसला किया है.
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